आखिर क्यों तेल छिड़ककर जिंदा जला दिया गया था इस महान इंसान को?

आखिर क्यों तेल छिड़ककर जिंदा जला दिया गया था इस महान इंसान को? 

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     प्रसिद्ध दार्शनिक, खगोलशास्त्री, गणितज्ञ और कवि महान जियोर्दानो ब्रूनो 16वीं सदी में इटली में पैदा हुए थे। निकोलस कोपरनिकस को वे अपना गुरु मानते थे और उन्हीं के विचारों का समर्थन किया करते थे। लेकिन वे ऐसे समय में पैदा हुए, जब यूरोप में लोग धर्म के प्रति अंधे थे। महान व्यक्तियों के साथ यह दुर्घटना अक्सर हो जाती है कि वे अपने समय से पूर्व गलत स्थान पर पैदा हो जाते हैं यह मैं इसलिए कह रहा हूँ कि अगर वे भारत जैसे मुल्क में पैदा होते तो उनके साथ वह कभी नहीं होता जो रोम की सड़कों पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और वह भी ऐसे लोगों के द्वारा किया गया जो स्वयं को धर्म सर्वोच्च ठेकेदार मानते थे।

क्या हुआ था? जियोर्दानो ब्रूनो के साथ! 

     महान खगोलशास्त्री जियोर्दानो ब्रूनो का कसूर भी वही था जो गैलीलियो का था, या फिर निकोलस काॅपरनिक्स था। जियोर्दानो का कहना था कि सिर्फ यही पृथ्वी अकेला ऐसा ग्रह नहीं है जिस पर जीवन है, पृथ्वी की भांति ऐसे और भी ग्रह हैं जिस पर जीवन की संभावना है। उनकी यह भी धारणा थी कि 'इस ब्रह्मांड में अनगिनत ब्रह्मांड हैं और सब अनंत और अथाह है।

     ब्रूनो का एक मत यह भी था कि पृथ्वी की तरह सूर्य भी अपने अक्ष पर घूमता है। जियोर्दानो ब्रूनो की बातें तत्कालीन चर्च के पोप और पादरियों को इतनी नागवांर लगी कि उन्होंने जियोर्दानो को बंदी बना लिया और उन्हें कारागृह में डाल दिया। निर्भीक और क्रांतिकारी विचार रखने वाले जियोर्दानो ब्रूनो को जीवन भर चर्च की तरफ से कठोर यातनाएँ दी गईं लेकिन वे अपने विचारों पर सदा अडिग रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल के लगभग 8 वर्ष कारागृह में बिताए मगर उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। जब चर्च के पोंगा-पंडितों को लगा कि यह आदमी हार मानने के लिए तैयार नहीं है तब उन्होंने एक योजना के तहत 17 फरवरी, सन् 1600 ई. को खुलेआम रोम में भरे चौराहे पर ब्रूनो को खंभे से बांध कर मिट्टी का तेल उन पर छिड़क कर जला डाला।

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     ब्रूनो ने हँसते हुए आग में जलना स्वीकार कर लिया लेकिन वे अपने तथ्यों और निष्कर्षों पर अडिग रहे। उनके चेहरे पर डर या पश्चाताप का कोई अहसास नहीं था। उन्हें पूर्ण विश्वास था कि एक ना एक दिन ऐसा अवश्य आएगा जब पूरी दुनिया उनकी खोज को सत्य मानेगी। आखिरकार सत्य की जीत हुई और विश्व ने उनके सिद्धांतों को स्वीकार कर ही लिया।

     ब्रूनो जिस मुल्क में जिस समय में पैदा हुए उस समय उनके तथ्यों को समझने वाले लोग न के बराबर थे इसलिए उनके विचारों का सिर्फ विरोध किया गया। उनकी निर्मम हत्या के बाद यह साबित हो गया कि सूर्य भी अपने अक्ष पर घूमता है और यह बात आज हम सभी को मालुम कि पृथ्वी ही नहीं सूर्य भी अपनी धुरी पर चक्कर लगाता है। ब्रूनो की हत्या के लगभग 200 वर्षों बाद हमारे सौरमंडल के 7वें ग्रह 'यूरेनस' की खोज हुई जिससे यह भी प्रमाणित हो गया कि ब्रह्मांड में और भी अनगिनत ब्रह्मांड, तारे, ग्रह, उपग्रह भी हैं जिन पर हमसे भी ज्यादा विकसित जीवन के होने की संभावना है। 



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