महिला नागा साधुओं के बारे में ये खास बातें शायद नहीं जानते होंगे आप

     

PRACTICAL LIFE महिलाएं भी हैं नागा साधु, जानिए कैसे बनती हैं...!


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      जब कोई महिला सन्यासिन बनती है तब उसके सन्यासिन बनने से पहले उस महिला को 6 से 12 वर्षों तक ठीक किसी पुरुष नागा की तरह ही कठिन बृह्मचर्य का पालन करना होता है। उसके बाद गुरु यदि इस बात से संतुष्ट हो जाते है कि महिला बृह्मचर्य का पालन करने में समर्थ है तब ही उसे दीक्षा दी जाती है। इस बीच यदि वह महिला ब्रह्मचर्या का ठीक से पालन नहीं कर पाती है तो उसे दीक्षा की अनुमति नहीं मिलती है।

    इतना ही नहीं! महिला को नागा सन्यासिन बनाने से पहले अखाड़े के संत-महंत उस महिला के घर परिवार और पिछले जीवन की भी जांच-पड़ताल करते है क्योंकि सन्यासिन बनने से पहले महिला को ये साबित करना होता है कि उसका परिवार और समाज से कोई मोह नहीं है। वह सिर्फ भगवान की भक्ति करना चाहती है। इस बात की संतुष्टि होने के बाद ही उसे दीक्षा मिलती है। पुरुषों की भांति ही महिला को नागा सन्यासिन बनने से पहले खुद का पिंडदान और तर्पण करना भी पड़ता है!

इसके अलावा नागा सन्यासिन बनने के पूर्व महिला को अन्य भी तमाम शर्तों से गुजरना पड़ता है!

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1. जिस अखाड़े से महिला सन्यास की दीक्षा लेना चाहती हैं, उस अखाड़े का जो प्रमुख आचार्य महामंडलेष्वर होता है वही उसे दीक्षा देता है, अन्य किसी के द्वारा दी हुई दीक्षा स्वीकृत नहीं होती है।

2. महिला को नागा सन्यासिन बनाने से पहले उस महिला का मुंडन किया जाता है और नदी में स्नान करवाया जाता है।

3. इस बीच महिला नागा सन्यासिन पूरा दिन भगवान का ध्यान व जप करती रहती है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर, नित्य कर्म करने के उपरांत शिवजी का जप करती है तथा दोपहर में भोजन करती है और पुनः शिवजी की आराधना में लीन हो जाती है। शाम के समय दत्तात्रेय भगवान की पूजा करती है उसके बाद ही उसे उसे सोने की इजाजत मिलती है।

4. सिंहस्थ और कुम्भ में नागा साधुओं के साथ ही महिला सन्यासियों को भी शाही स्नान करना होता है अखाड़े में सन्यासियों को ठीक वैसा ही सम्मान दिया जाता है जैसा नागा साधुओं को मिलता है इस संबंध में कोई भेदभाव नहीं है।

5. सन्यासिन बनने के बाद पुरुष नागा साधुओं और महिला नागा साधुओं में सिर्फ स्त्री और और पुरुष के भेद के अलावा जो भेद रहता है वह सिर्फ उनके पहनावे का है अन्य कोई भेद नहीं होता है। महिला नागा साधू को एक वस्त्र से अपने शरीर को ढककर रखना होता है जबकि पुरुष नागा पूरी तरह नग्न होते हैं। स्नान के समय यही अकेला वस्त्र पहनकर सन्यासियों को स्नान करना होता है क्योंकि महिला सन्यासियों को बिना वस्त्र के स्नान करने की अनुमति नहीं है। जो महिलाएं कुम्भ मेले के समय नग्न होकर स्नान करती नजर आती हैं वे दिक्षा की दृष्टि से प्रमाणित नहीं होती हैं, वे सब भक्ति भाव के भावावेश में आकर ऐसा करती हैं।

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1 comments:

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Unknown
admin
November 17, 2019 at 4:33 AM ×

Very nice

Congrats bro Unknown you got PERTAMAX...! hehehehe...
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