लक्ष्मण का पहला प्रेम/सच्चा प्यार तुम्हें पाने की हसरत नहीं रखता है।

लक्ष्मण का पहला प्रेम/सच्चा प्यार तुम्हें पाने की हसरत नहीं रखता है। 

     जब पहली दफा राम और लक्ष्मण जनकपुरी पधारे तो जनक की वाटिका में में दोनों भाई टहल रहे थे। वहीं सीता भी अपनी सहेलियों के साथ फूल तोड़ने आई थी। उनकी निगाह सबसे लक्षमण के ऊपर पड़ी थी। वह मन ही मन लक्षमण को चाहने लगी थी। इधर जब राम ने सीता को देखा तो देखते ही वे भी सीता पर मोहित हो गए। न राम को पता था कि सीता लक्षमण को चाहती है, न सीता को पता था कि राम उस पर मोहित हैं। परंपरागत रूप से विवाह पहले राम का होना था लेहाजा राम ने सीता से विवाह करने की शर्त पूरी कर दी और सीता से विवाह कर लिया।

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     लेकिन प्रेम का तीर लक्ष्मण के ह्रदय में समा चुका था इसलिए वे सीता से अलग होकर रहने की बात सपने में भी नहीं सोंच सकते थे। इसी कारण वे अपनी पत्नी उर्मिला को छोड़कर सीता के पीछे जंगल जले गये थे जिंदगी भर उर्मिला पति के प्रेम के लिए तरसती रही। इस बात का प्रमाण रामायण में ही मौजूद है। सीता की फिकर जितनी लक्षमण को रहती थी उतनी राम को कभी नहीं रहती थी। सुपनखा! जो रावण की बहन थी उसका रुप और सौंदर्य सीता से भी ज्यादा मनमोहक था बावजूद इसके लक्षमण ने उसके नाक और कान काट डाले वे उससे विवाह करने के लिए मना भी कर सकते थे। बनवास की सजा अकेले राम को मिली थी, लक्षमण को नहीं! लेकिन लक्षमण भी जंगल चले गए इसकी वजह राम भैया नहीं बल्कि सीता मैय्या थीं।

     सच्चा प्रेम तुम्हें पाने की हसरत नहीं रखता है, वह सिर्फ तुम्हें अपनी आंखों के सामने देखना चाहता है। क्योंकि तभी उसे भरोसा आता है कि तुम सुरक्षित हो। सच्चा प्रेमी तुम्हारा अंगरक्षक है, तुम्हारा बाॅडीगार्ड है। अगर वह है तुम्हारे जीवन में तो तुम निश्चिंत हो, सुरक्षित हो। प्रेम के बिना सब तरफ खतरा ही खतरा है। लक्षमण का काम सिर्फ सीता की रक्षा करना है इसलिए वे कभी लक्षमण रेखा खींच देते हैं और कभी कुटिया के बाहर खड़े होकर पहरेदारी करते हैं।

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