स्त्रियों का उघड़ा बदन पुरूषों को इतना क्यों आन्दोलित करता है? Psychoanalysis,

स्त्रियों का उघड़ा बदन पुरूषों को इतना क्यों आन्दोलित करता है?

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     दुनियाँ भर में स्त्रियों के नग्न शरीर को देखने की पुरूषों  की तरफ से भरसक चेष्टा चलती है, इसके लिए पुरूषों की तरफ से नित नये-नये अनुसंधान किये जाते हैं। किसी भी प्रकार से पुरूष स्त्री को नग्न देखना चाहता है जरा-सा स्त्री का बदन उघड़ा कि पुरुष उसे निहारने से नहीं चूकता है। घर हो, होटल हो, बाथरूम हो सब जगह पुरूष ने इंतजाम कर रखा है, सब जगह उसने छिद्र बना रखे हैं, गुप्त कैमरे फिट कर रखे हैं। जैसे ही वह कपड़े हटाना शुरूं करती है यह पुरूष तत्काल हरकत में आ जाता है और टकटकी लगाकर उसे देखने लगता है।

     स्त्रियों का उघड़ा बदन पुरूषों को इतना आन्दोलित करता है, इतना रोमांचित करता है कि उसे वह बार-बार देखना चाहता है। अभी कुछ दिन पहले की बात है मैं, बाइक से कहीं जा रहा था, मेरे बराबर से एक युवती स्कूटी से निकली, उसने कपड़े कुछ ऐसे पहने थे कि उसकी पीछे से कमर दिख रही थी, बस उतना सा भाग उघड़ने की वजह से, जो भी शख्स उसके करीब से गुजरता, उसे निहारने लगता, वह तत्क्षण अपना वाहन धीमा कर लेता, मैं बड़ा चकित हुआ, मामला क्या है? क्या देख रहे हो?

     तुमने देखा होगा! गांवों में नौटंकी-ड्रामा, नाच-प्रोग्राम इत्यादि होते हैं, वहां जब स्टेज पर नर्तकी नाचती है गोल-गोल तो उसका घाघरा हवा में ऊपर उठने लगता है और जब वह कपड़ा ऊपर उठने लगता है तब स्टेज के नीचे जो बैठे लोग होते हैं वे झांक-झांककर देखते हैं और मजा यह कि उन देखने वालों में बूढ़े लोग भी होते हैं वे भी उस अवसर को चूकना नहीं चाहते, और वे जो देखना चाहते हैं वह जरुरी नहीं है कि वहां मौजूद ही हो, क्योंकि कभी-कभी वह नर्तकी की जगह नर्तक कपड़े पहनकर नाचने लगता है! क्या बिमारी है?

     सारी दुनियाँ में स्त्रियों के उघड़े शरीर की बड़ी मांग है, इसलिए स्त्रियों के नग्न फोटो, बीडीओ जितना पुरूष देखते हैं उतना पुरूषों के नग्न फोटो व बीडीओ स्त्रियाँ नहीं देखती हैं, स्त्रियाँ बिल्कुल भी नग्न पुरूष में उत्सुक नहीं हैं, स्त्रियों को जरा भी रस नहीं है कि वह नग्न पुरूष को देखे, अगर कोई भूल-चुक से नग्न पुरूष किसी स्त्री के सामने आ भी जाय तो वह मुंह फेर लेती है, वह कतई उसे नहीं देखना चाहती है। इसलिए गहन प्रेम के क्षणों में जब पुरूष स्त्री को नग्न करता है और खुद भी नग्न हो जाता है तो उस क्षण में भी वह अपनी आंख बंद कर लेती है, उस क्षण में भी वह उसे देखना नहीं पसंद करती है। प्रायः देखा गया है स्त्रियाँ पुरूषों के बजाय छोटे बच्चों में ज्यादा उत्सुक होती हैं, इसलिए पुरुषों को स्त्रियों के समक्ष अपने शरीर का प्रदर्शन करना उचित नहीं है, उसका कोई भी मूल्य नहीं है।

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पुरुष का चित्त स्त्रियों के पीछे क्यों सतत भागता रहता है?

     लड़कियों का मनोविज्ञान यह भली-भांति जानता है कि लड़कों को उनका जिस्म ही बेहद भाता है वह उनके उघड़े बदन को बड़ी कामुकता से देखता है। इसीलिए स्त्रियों को अपने अंगों का प्रदर्शन करना मजबूरी बन जाता है। लेकिन यह प्रदर्शन क्यों करना पड़ता है? क्यों पुरुषों का चित्त स्त्रियों के ईद-गिर्द ही मड़राता रहता है? मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि पुरूष अपने जीवन की ऊर्जा का नब्बे प्रतिशत भाग स्त्रियों के प्रति ही समर्पित कर देता है। उसका मस्तिष्क कभी स्त्रियों के चिंतन से मुक्त ही नहीं हो पाता है। मैंने देखा है! यहां युवा तो युवा बूढ़े भी, जो एकदम कब्र में ही पैर लटकाए बैठे हैं उनका दिमाग भी स्त्रियों में ही उलझा हुआ है। वे भी मोबाइल में महिलाओं के नग्न फोटो और बीडीओ खोज रहे हैं।

पुरुष की ऊर्जा का मूल स्रोत होती है स्त्री! 

     दरअसल जगत के तमाम महत्वपूर्ण नियमों में यह भी एक महत्वपूर्ण नियम है कि यहाँ सभी चीजें अपने मूल श्रोत को लौटती हैं, पुरूष की ऊर्जा स्त्री के शरीर से निर्मित होती है इसलिए वह निरंतर स्त्री की तरफ ही भागती है, स्त्री उसका मूल उद्गम है, मूल श्रोत है। स्त्री का सानिध्य पाकर ही पुरूष की थकान मिट पाती है! प्रथम तल पर समझें तो पुरुष की ऊर्जा के लिए सूकून भरा घर होती है स्त्री, इसलिए वह सदा अपने घर लौटने के लिए व्यथित रहता है। 

     साधारणत: पुरुषों का स्त्रियों के पीछे भागना स्वाभाविक है किंतु जिन्हें अपने व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास करना होता है, अपने भीतर कुछ नया प्रकट करना होता है उन्हें अपनी ऊर्जा को ठीक इसके विपरीत दिशा देनी होती है। अभी तो जैसे कोल्हू का बैल होता है, कोल्हू के इर्द-गिर्द ही चक्कर काटता रहता है ठीक वैसे ही यह पुरुष भी सारा जीवन स्त्रियों के इर्द-गिर्द ही चक्कर काटता रहता है।

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