क्या ताक-झांक करने से भी मिलता है यौन सुख? Psychoanalysis

क्या ताक-झांक करने से भी मिलता है यौन सुख?

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ताक-झांक, यानी दूसरे स्त्री या पुरुष को रतिक्रिया करते देखना या प्रेमी-प्रेमिका को आपस में आलिंगनरत देखना ज्यादातर उन स्थानों में प्रचलित होता है जहाँ नित नये-नये विवाहित जोड़े या प्रेमी-प्रेमिकाएं आते हैं और दिल खोलकर सहवास का या कामुक क्रियाओं का आनंद लेते हैं। ऐसी ही एक जगह है लखनऊ में 'जाॅगर्स पार्क, हालांकि प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए ऐसे स्थान हर शहर में मौजूद रहते हैं लेकिन यह पार्क इस तरह की सुविधाओं के लिए बेहतर है क्योंकि यह शहर से बाहर है। यहां दूर-दूर से प्रेमी-प्रेमिकाएं एक दूसरे के जिस्मों को सहलाने व प्रेम को परिपक्व करने की इच्छा से आते थे। ताक-झांक करने वाले लोग इस पार्क की दीवार को पकड़े घंटों तक उस दृश्य को देखने के लिए प्रतीक्षारत रहते हैं और जब युवक-युवतियां कामोत्तेजक क्रियाएँ करते हैं तब ऐसे लोग अपने भीतर एक असीम आनंद की अनुभूति महसूस करते हैं।

हस्तमैथुन करने वाले होते हैं अक्सर ताक-झांक की आदत का शिकार!

     इस तरह के असीम आनंद की अनुभूति हस्तमैथुन के माध्यम से भी प्राप्त होती है, ऐसे व्यक्ति प्रायः छिपकर देखे गये दृश्यों को याद कर-करके हस्तमैथुन करते हैं और अपनी वासना का शमन करते हैं। ऐसे लोग अश्लील पत्रिकाएं, अश्लील वीडियो, अथवा अश्लील गतिविधियों में अधिक लिप्त पाये जाते हैं। इस तरह के तमाम स्त्री व पुरूष हैं जो दूसरों की कामक्रीड़ा देखने में ज्यादा रस लेते हैं, मनोविज्ञान कहता है कि अधिकतर लोग इसी की इच्छा रखते हैं कि वे दूसरों को रतिक्रिया करते हुए देखें! इंटरनेट पर अश्लील सामग्री की भरमार, होटलों, गर्ल्स हॉस्टलों, लेडीज बाथरूमों में फिट गुप्त कैमरों के पीछे इसी मानसिकता का हांथ है।

    1859 में जन्में हेवलाॅक एलिस, एक सुप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थे उनका कहना है कि अश्लील दृश्यों को देखकर, दूसरे स्त्री-पुरुष को सहवास करते देखकर या भिन्न लिंग के जानवरों आदि की कामक्रीड़ा को देखकर सुख प्राप्त करना किसी हद तक स्वाभाविक भी है। बड़े से बड़े सम्मानित व्यक्ति भी अपनी जवानी में लड़कियों के शयनकक्ष में झांकते हैं, इसी प्रकार लड़कियाँ भी लड़कों की हरकतों पर नजर रखती हैं। मकान मालिकने या नौकरानियां छिद्रों से ऐसे कमरों में झांकने की इच्छा रखती हैं जिनमें नवविवाहित पति-पत्नी रहते हैं। ऐसे ताक-झांक या छिपकर देखने की क्रिया को 'प्रछन्न दर्शन रति' कहते हैं, अंग्रेजी में इसे VOYEAR कहा जाता है। मध्य युग के नबाब, बादशाह अपने सामने नवविवाहित जोड़ों से रतिक्रिया करवाकर अपनी यौन इच्छा की पूर्ति करते थे। आजकल अमेरिका या यूरोपीय देशों के हिप्पियों के बीच यह प्रथा खूब प्रचलित है।

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     आज भले ही कुछ समाजों में इस प्रथा को कुत्सित माना जाता है किन्तु आज पहले से ज्यादा ऐसे स्त्री या पुरुषों की संख्या है जो छुपछुपाकर कामक्रीड़ा में रत लड़के-लड़कियों या अश्लील वीडियो देखकर अपार सुख की अनुभूति करते हैं। तिरछी निगाह से जानवरों को सहवास करते हुए देखना लगभग सभी को आनंददायी लगता है, हालांकि कोई भी स्त्री या पुरुष इसे स्वीकार नहीं करेगा। 

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