हंसना, खिलखिलाना जीवन का गीत है, हंसी स्वास्थ्य की अभिव्यक्ति है, और सौंदर्य का प्रतीक भी।

हंसना, खिलखिलाना जीवन का गीत है, हंसी स्वास्थ्य की अभिव्यक्ति है, और सौंदर्य का प्रतीक भी।

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     हंसना, खिलखिलाना जीवन का गीत है, दिल की गहराइयों से जलती मशाल की तरह उठी हंसी-ठिठोली जीवन का एक तराना बन जाती है। जब दो प्रेम करने वाले हंसते हैं तब उनके साथ सारा आसमान हंसता है। आपसी रिस्तों में बंधे लोग जब हंसते हैं तब उनके साथ-साथ पृथ्वी का संपूर्ण जीवन मुस्कुराता है। स्वतंत्र ह्रदय की गहराइयों से पैदा हंसी मनुष्य को दिव्य और पवित्र बनाती है, हंसी ह्रदय की खूबसूरती है, संबंधों को मजबूत करने वाली ऊर्जा है, हंसी स्वास्थ्य की अभिव्यक्ति है, और सौंदर्य का प्रतीक भी।

     हंसो ऐसे जैसे छोटे बच्चे हंसते हैं, गौर से देखो उन्हें, जब वे हंसते हैं तब अपने भीतर सारा आस्तित्व समेट लेते हैं, तब केवल हंसी ही शेष रह जाती है, बल्कि वे हंसी ही बन जाते हैं। इसलिए हंसो! कुनकुने-कुनकुने नहीं, पूरे उबाल के साथ, तुम हंसोगे, तभी यह आस्तित्व हंसेगा, तुम मुस्कुराते नहीं इसीलिए यह उदासी घेरे हुए है। याद रखो, जिसे हंसना नहीं आता, उसे कुछ भी नहीं आता, वह फिर रिक्त है, खाली है।

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1. मुल्ला नसरुद्दीन के पड़ोसी ने उससे कहा कि अपने शाहबजादे को सम्हालो, अभी से लुच्चा है। कल मेरी पत्नी को पत्थर मारा। मुल्ला ने पूछा, लगा? उसने कहा कि नहीं। तो उसने कहा : कि वे किसी और के शाहबजादे होंगे। मेरे शाहबजादे का निशाना तो लगता ही है। वे किसी और के होंगे। तुम बेकार में उल्हाना न दो।

2. आधी रात में एक महिला का बच्चा रो रहा था, घर में कोई मेहमान ठहरा था, उसने कहा तुम लोरी गाकर बच्चे को सुला क्यों नहीं देती? उस महिला ने कहा कि लोरी गाने पर पड़ोस के लोग ऐतराज करते हैं। मेहमान ने कहा, मैं कुछ समझा नहीं। महिला ने कहा, पड़ोस के लोग कहते हैं, तुम्हारी लोरी से तो तुम्हारे बच्चे का रोना ही अच्छा है।

3. मुल्ला नसरुद्दीन ने मुझे कहा कि मेरे पिता मुझसे कह रहे थे कि बस्ती में एक गंदी फिल्म लगी है, वहाँ मत जाना देखने, क्योंकि वहाँ तुम कुछ ऐसी चीजें देखोगे जो न देखते तो अच्छा था। मुल्ला ने कहा मुझे पता भी नहीं था कि कोई ऐसी फिल्म भी लगी है। अब जब बाप ने ऐसी खबर सुना दी तो जाना ही पड़ा। तो फिर मुल्ला से किसी ने पूछा कि फिर तुम्हें वहां ऐसी चीजें दिखाई पड़ीं जो अच्छा होता कि तुम न देखते? उसने कहा हां, क्योंकि मेरे पिताजी भी वहां मौजूद थे, वे मुझे दिखाई पड़े। उन्होंने मुझे देख लिया; मैंने उन्हें देख लिया, बात समझ आ गई कि उन्होंने जो कहा था, ऐसी चीजें दिखाई पड़ीं, मुझको भी और उनको भी, जो न दिखाई पड़ती तो अच्छा होता। क्योंकि उस दिन से न वे मुझसे कुछ बोलते हैं और न मैं उनसे कुछ बोलता हूँ। अब हम दोनों चुप्पी साधे हुए हैं।

4. नन्हा बबलू झूठ बोलते हुए पकड़ा गया। उसकी माँ ने पूछा, इस तरह तुम स्वर्ग में कैसे प्रवेश कर पाओगे? ' बबलू ने कुछ देर सोंचा और फिर कहा, मैं अन्दर-बाहर- अन्दर-बाहर दौड़ते रहूंगा, दरवाजा पटकता रहूंगा। फिर वे परेशान होकर बोलेंगे, बबलू भगवान के लिए या तो अंदर आओ या बाहर जाओ तो मैं अंदर आ जाऊँगा।

5. मुल्ला नसरुद्दीन एक दिन उदास बैठा था। पड़ोसी ने पूछा बड़े उदास मालुम हो रहे हो, तुम्हें तो खुश होना चाहिए, पिछले हफ्ते तुम्हारे चाचा जी मरे वे सारी जायदाद तुम्हारे नाम कर गए। नसरुद्दीन उदासी भरी अंगड़ाई लेते हुए बोला, हां, उसके पिछले हफ्ते नानाजी स्वर्ग सिधारे थे वे भी अपनी जायदाद मेरे नाम कर गए थे, उसके पिछले हफ्ते मौसा चल बसे थे वे भी अपनी सारी जमीन जायदाद मेरे नाम कर गए थे। आज शनिवार हो गया, पूरा सप्ताह निकला जा रहा है, अभी तक कहीं से कोई खबर नहीं आई, इसीलिए मन दुखी है। 

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