क्यों मनाते हैं होली का त्योहार? जानिए होली से जुड़ी अनोखी बातें। PRACTICAL life

क्यों मनाते हैं होली का त्योहार? जानिए होली से जुड़ी अनोखी बातें। 

https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
     होलिका हिरण्यकश्यप नाम के दैत्यराज की बहन थी और प्रह्लाद हिरण्यकश्यप का पुत्र और विष्णु का परम भक्त था, होलिका प्रह्लाद की सगी बुआ थी। विष्णु का धुर-विरोधी होने के कारण हिरण्यकश्यप को यह कतई सहन नहीं था कि कोई भी उसके राज्य में विष्णु के नाम की महिमा का बखान करें! हिरण्यकश्यप राज्य के अन्य लोगों का तो मुंह बन्द करने में सफल हो गया किंतु अपने ही पुत्र प्रह्लाद ने उसकी एक न मानी और वह दिन-रात विष्णु की भक्ति में लीन रहने लगा। 

     जहाँ एक तरफ समस्त जनता राजा हिरण्यकश्यप की जयजयकार करती थी वहीं दूसरी तरफ प्रह्लाद विष्णु के गुणगान में लीन रहता था। हिरण्यकश्यप इस विष्णु भक्त प्रह्लाद को भी अपने पक्ष में कर लेना चाहता था, यह बात उसके लिए एक तरह की चुनौती बन चुकी थी। इसके लिए उसने प्रह्लाद पर तरह तरह के अत्याचार किए और उसे मार डालने के लिए तमाम जतन भी किए किंतु प्रह्लाद किसी भी शर्त पर विष्णु भक्ति छोड़ने पर राजी न था। अन्ततः हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह इस विष्णु भक्त प्रह्लाद को मार डाले। 

     होलिका के बारे में कहा जाता है कि उसे यह वरदान प्राप्त था कि उसे आग भी नहीं जला पाती थी। इस काम के लिए होलिका ने एक बहुत बड़ी चिता तैयार करवायी और उसमें प्रह्लाद को लेकर बैठ गयी यह कहकर कि यदि विष्णु में कोई शक्ति होगी तो वह अपने भक्त को अवश्य बचा लेगा। देखते ही देखते चिता धू-धू कर जलने लगी, लपटों के बीच होलिका और प्रह्लाद कहीं खो गए, जब लपटें शान्त हुईं तो लोग देखकर सन्न रह गया, चमत्कार हो चुका था, होलिका जलकर खाक हो चुकी थी और विष्णु भक्त प्रह्लाद का एक बाल भी नहीं झुलसा था, वह अब भी आंखें बंद किए भगवान विष्णु का नाम जप रहा था। धन्य है प्रह्लाद की भक्ति। 

https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
     इसी दिन से होलिका दहन का प्रारंभ माना जाता है, यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। साल में एक बार आने वाले इस पर्व का इन्तजार लगभग सभी वर्ग के लोगों और खासकर महिलाओं और बच्चों को खूब रहता है। क्योंकि इस त्योहार के अवसर पर ढेर सारे पकवान, मिठाईयां, नये-नये कपड़े सभी कुछ बड़ी आसानी से मिल जाता है। रंग गुलाल लगाने के बहाने भौजाईयों के जिस्म को दूर से निहारने वाले देवरों को भी उनके बदन को मसलने का मौका मिल जाता है और भैया भी बुरा नहीं मानते क्योंकि होली होती है। रंगो का फायदा उठाने में जीजा-साली भी नहीं चूकते, साली जीजा से भड़ास निकाल लेती है और जीजा साली को रगड़ लेता है, और यह सब बड़े मजे से सबके सामने हो जाता है। 

https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
     इस त्योहार के मौके पर निश्चित ही बुराई कमजोर पड़ जाती है, और जब बुराई कमजोर पड़ जाती है तभी अच्छाई खुलकर अपना प्रदर्शन कर पाती है, इसलिए इस अवसर पर 'प्रेम, को भी एक मौका मिल जाता है और वह भी अपनी भूमिका का प्रर्दशन करने से पीछे नहीं हटता है। तमाम रूठे ह्रदय इस दिन एक साथ हो जाते हैं और अनेक नए रिश्ते भी एक दूसरे का दामन थाम लेते हैं क्योंकि प्रेम का काम ही होता है जोड़ना, मिलना, मिलाना। इसलिए होली को मिलन का, प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। 





Previous
Next Post »