युरुशलेम! दुनियाँ की सबसे विवादित जगह, जहाँ आज भी जारी है कत्लेआम! Nonviolence

युरुशलेम! दुनियाँ की सबसे विवादित जगह, जहाँ आज भी जारी है कत्लेआम!


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     अभी तक आपने मंदिरों, मस्जिदों के नाम पर जो झगड़े फसाद देखे हैं, धर्म के नाम पर जो कत्लेआम देखे हैं वे इस जगह की तुलना में बहुत छोटे हैं। यद्यपि यह जगह भी एक प्राचीन धार्मिक स्थली है किंतु धर्म के नाम पर जितना अधर्म, जितना अन्याय, जितना पाप, जितना नरसंहार यहां हुआ है उतना इस पृथ्वी पर और शायद ही कहीं हुआ होगा।

     सैकड़ों, हजारों नहीं! लाखों-करोड़ों लोग यहाँ अपनी जानें गवां चुके हैं और आज भी यहां संघर्ष जारी है और मजे की बात तो यह है कि यह सब खून-खराबा धर्म के नाम होता है। धर्म के नाम पर इस पृथ्वी पर जितना खून बहा है उतना किसी और के लिए नहीं बहा है और जहाँ धर्म के लिए यह सब हो रहा है वहाँ अधर्म की शक्ल सूरत क्या होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

     जिस जगह के बाबत मैं बात कर रहा हूं यह जगह है युरुशलेम! युरुशलेम को दुनियाँ का सबसे विवादित शहर माना जाता है। क्योंकि इस शहर पर तीन-तीन धर्मों की दावेदारी है। इसीलिए यहां निरंतर एक दूसरे में तनातनी बनी रहती है और लोग एक-दूसरे की गर्दनें काटने के लिए सदा तैयार बैठे रहते हैं।



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     यदि धर्मों की बात करें तो हिंदू धर्म अति प्राचीन धर्म माना जाता है, करीब दस हजार वर्ष से भी ज्यादा प्राचीन, यहूदी धर्म केवल पांच हजार साल पुराना है, ईसा मसीह को हुए करीब तेईस सौ वर्ष हुए हैं यानी ईसाईयत लगभग दो से ढाई हजार वर्ष पुरानी है। मोहम्मद साहब का जन्म पांच सौ सत्तर (570) ईसवी के करीब बताया जाता है इस तरह इस्लाम करीब चौदह सौ वर्ष पुराना हुआ।

ईसाइयत और इस्लाम का इतिहास!

     हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई इन चार धर्मों के संबंध में हम सब जानते हैं। इनमें इस्लाम और ईसाई धर्म यहूदी धर्म की ही शाखाएं हैं, यहूदी धर्म के बिना इन दोनों धर्मों का कोई आस्तित्व नहीं है। पैगंबर अब्राहिम जिन्होंने अपने प्रिय इकलौते पुत्र इसहाक की गर्दन परमेश्वर को सौंप दी थी, वही इन दोनों धर्मों के मूल हैं। उस समय न मोहम्मद साहब थे और न ही जीसस पैदा हुए थे। अगर ठीक से समझें तो दुनियां में मात्र दो ही धर्म हैं जो प्राचीन हैं। सिख, ईसाई, इस्लाम बहुत पुराने नहीं हैं, वे आधुनिक हैं कहना चाहिए युवा हैं, यहूदी और हिंदू धर्म अब बूढ़े होने की कगार पर हैं, इसलिए इनका प्रभाव कम होना स्वाभाविक है।

युरुशलेम क्यों है फसाद की जड़!

      युरुशलेम जितना पुराना है उसका इतिहास भी उतना ही पुराना है। बताते हैं, मोहम्मद साहब के जन्म के बहुत पहले ही यहूदी अरब में आकर बस गए थे। तब अरबवासियों का अपना कोई संगठित धर्म नहीं था क्योंकि वे सब एक खानाबदोश, एक कबीले की भांति रहा करते थे। जीसस और मोहम्मद के जन्म से पहले या यूं कहें ईसाई और इस्लाम धर्म के पहले यहूदियों का ही वर्चस्व कायम था। यहूदी जब अरब में दाखिल हुए तब उन्होंने वहां रह रहे लोगों पर अपना धर्म थोपना चाहा, बहुत से अरबी लोग उनसे राजी भी हो गए थे, जीसस के जन्म से लगभग सात-आठ सौ वर्ष बाद जब मोहम्मद साहब पैदा हुए तब उन्होंने उन सभी खानाबदोशियों व कबिलाई लोगों को एकत्रित किया और एक नया संगठित धर्म खड़ा किया जिसका नाम उन्होंने (इस्लाम) रखा जिसका अर्थ होता है (शांति का संदेश) मुस्लिम या मोहम्मडम धर्म वह नहीं है जो मोहम्मद साहब ने बनाया था।

युरुशलेम पर यहूदियों का दावा:


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     प्राचीन शहर युरुशलेम में यहूदियों के राजा सुलेमान का प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है। मंदिर तो बहुत पहले ही रोमियों द्वारा नष्ट कर दिया गया था अब उस मंदिर की एक दीवार शेष बची है जिसे (वेस्टर्न वाॅल) के नाम से जाना जाता है। यहूदी इसी दीवार पर माथा रखकर परमेश्वर से क्षमायाचना करते हैं और अपनी मन्नतें पूरी होने के लिए प्रार्थना करते हैं। यहूदी मानते हैं कि जिस जगह पर यह मंदिर स्थित है यही जगह पृथ्वी का केंद्र है इसी जगह से परमेश्वर ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी और हजरत अब्राहम ने अपने पुत्र की बलि भी इसी स्थान पर परमेश्वर को भेंट की थी। इसी वजह से यहूदी इस जगह को किसी भी कीमत पर छोड़ने के लिए राजी नहीं हैं।

ईसाइयत का दावा:


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     जिस जगह पर यहूदी अपना पवित्र मंदिर बताते हैं, ठीक उसी जगह पर ईसाईयों का दावा है कि यही वह स्थान है जहां जीसस को सूली पर चढ़ाया गया था। इसी मंदिर के बाबत बाईबल में उल्लेख है कि (उसने मंदिर में बैठे चुंगी लेने वालों को फटकार लगाई थी) ईसाई कहते हैं इसी स्थान पर प्रभु ने मृत्यु के बाद जीवित होने पर अपने शिष्यों को दर्शन दिए थे। इसलिए ईसाईयों के लिए यह जगह दुनियाँ की सबसे पवित्रम जगहों में से एक है।

मुस्लिमों का दावा:


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     मुस्लिमों का दावा भी बड़ा दिलचस्प है। यहूदियों के मंदिर की दीवार वेस्टर्न वाॅल के ठीक बगल में मुस्लिमों की 'अल-अक्सा' मस्जिद है जो मुसलमानों के लिए मक्का-मदीना के बाद तीसरा सबसे पवित्र स्थान है। मुसलमानों का दावा है कि मोहम्मद साहब अपने अंतिम दिनों में इसी स्थान पर रहा करते थे और यहीं से वे सीधे स्वर्ग चले गए थे। इन तीनों धर्मों के दावे और तर्क अपनी-अपनी जगह पुख्ता हैं इसीलिए आज तक युरुशलेम की समस्या पर राजनीतिज्ञों ने सिर्फ अपनी रोटियाँ ही सेंकीं हैं किंतु कोई समाधान नहीं निकाल पाये हैं।

युरुशलेम की जमीन पर यहूदियों का सबसे ज्यादा हुआ है कत्लेआम!

     इतिहास की घटनाओं पर नजर डालें तो इस त्रिकोणीय धर्मों की लड़ाई का खामियाजा सबसे ज्यादा यहूदियों को ही भुगतना पड़ा है। अकेले एडोल्ड हिटलर ने ही लाखों-लाख यहूदियों को मौत के घाट उतरवा दिया था। और यह सब इसलिए हुआ है क्योंकि यहूदियों का दावा था कि वे ही केवल परमेश्वर के चुने हुए सर्वश्रेष्ठ लोग हैं। जैसे भारत में ब्राह्मण स्यमं को ब्रह्म का 'मुख' मानते हैं और अन्य जातियों को स्यमं से नीचे बताते हैं। यहूदियों ने ही निर्दोष जीसस को सूली पर चढ़ा दिया था। जीसस की मृत्यु के बाद यहूदियों का जो कत्लेआम हुआ है उसके जिम्मेवार यहूदी स्यमं ही हैं, यह बीज उन्हीं के द्वारा बोया गया था जो कालांतर में फलित हुआ है।

इजराइल का इतिहास:

     युरुशलेम! जहाँ यह त्रिकोणीय आस्था का केंद्र स्थिति है, यह जगह अमेरिका द्वारा यहूदियों के लिए बसाये गए देश इजराइल के क्षेत्र में आती है और इजराइल चारों तरफ से मुस्लिमों से घिरा हुआ है इसलिए मुस्लिमों का दबदबा यहां सबसे ज्यादा रहता है। दूसरे विश्व युद्ध से पहले 'इजराइल, का कोई नामोनिशान नहीं था, किंतु आज यह पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।

हथियारों के दम और सेनाओं के बल पर बनाया गया इजराइल:

     इतिहासकार मानते हैं ईसापूर्व यहूदियों के पास अपनी खुद की जमीन थी जो बाद में मुसलमानों द्वारा हड़प ली गई। अपनी खोई हुई जमीन हासिल करने के लिए यहूदी और ईसाई सदियों तक मुसलमानों से जूझते रहे किंतु सफलता नहीं मिली। फिलिस्तीन और युरुशलेम पर दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका और ब्रिटिश की फौंजें अपना शासन चलाती थी। हथियारों और सेनाओं के बल पर अमेरिका और ब्रिटिश इन दोनों ईसाई मुल्कों ने वह करके दिखा दिया जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती, उन्होंने यहूदियों के लिए एक नया राष्ट्र बना डाला जिसे इजराइल कहा जाता है। यहूदियों को अपना घर तो मिल गया किंतु यह घर चारों तरफ़ से मुसलमानों से घिरा हुआ है, इसलिए यहाँ सदा तनाव की स्थिति बनी रहती है।


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