मकर संक्रांति से जुड़ी कुछ रोचक बातें! मकर संक्रांति मुख्यतः हिन्दुओं का त्योहार माना जाता है।

मकर संक्रांति से जुड़ी कुछ रोचक बातें! मकर संक्रांति मुख्यतः हिन्दुओं का त्योहार माना जाता है।

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     मकर संक्रांति मुख्यतः हिन्दुओं का त्योहार माना जाता है। किंतु इसे संपूर्ण भारत में मनाने की परंपरा है। यह त्योहार पौष महीने अर्थात 14, 15 जनवरी को जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है तब मनाया जाता है।

    कालगणना के अनुसार उत्तरायंण का उदय भी इसी दिन से माना जाता है। वर्ष में दो अयन होते हैं, उत्तरायंण और दक्षिणायन! दक्षिणायन नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है और उत्तरायंण को शुभ बताया गया है। हिंदू धर्म के मतानुसार जब सूर्य उत्तरायण में होता है तब देवताओं का दिन होता है और दक्षिणायन में रात्रि होती है।

     महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह की पराजय दक्षिणायन के पूर्वार्द्ध में हुई थी परंतु उन्होंने अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण आने तक प्रतीक्षा की थी। यह उनके लिए इसलिए संभव हुआ था क्योंकि उन्हें स्वेच्छा से प्रांण त्यागने का वरदान प्राप्त था।


मकर संक्रांति से जुड़ी कुछ रोचक बातें!

1. मकर संक्रांति का नाम, मूलतः मकर राशि के नाम पर ही पड़ा है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है इसीलिए इस मुहूर्त को मकर संक्रांति कहते हैं।

2. चंद्र मास के अनुसार प्रत्येक महीने में दो पक्ष होते हैं शुक्लपक्ष और कृष्णपक्ष! इसी भांति सूर्य के भी प्रत्येक वर्ष में दो पक्ष 'अयन' होते हैं जिन्हें दक्षिणायन एवं उत्तरायन कहा जाता है। मकर संक्रांति से उत्तरायण का प्रारंभ होता है जो मकर राशि से लेकर कर्क राशि तक छः महीने तक चलता है, कहीं-कहीं इस पर्व को उत्तरायन के नाम से भी जाना जाता है। बसंत ऋतु की शुरुआंत भी इसी दिन से शुरूं हो जाती है।

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3. मकर संक्रांति के त्योहार को संपूर्ण भारत में अलग-अलग तौर-तरीकों के साथ मनाया जाता है। दक्षिण भारत में इसे पोंगल के नाम से मनाया जाता है, उत्तर भारत में यह लोहड़ी, खिचड़ी आदि नामों से मनाया जाता है।


4. मान्यता है कि सूर्यदेव सदैव अपने पुत्र शनिदेव से खफा ही रहते हैं। इस दिन सूर्यदेव अपनी नाराजगी त्यागकर उनसे मिलने उनके घर गए थे इस कारण से भी इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान, पूजा आदि करने से विशेष लाभ होता है। इस दिन गंगातट पर मेला भी लगता है।

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