महाकालेश्वर मंदिर के ये गूंण रहस्य नहीं जानते होंगे आप! यहाँ, आरती के समय महिलाओं को करना पड़ता है घूंघट! AMEGIN WORLD

महाकालेश्वर मंदिर के ये गूंण रहस्य नहीं जानते होंगे आप! यहाँ, आरती के समय महिलाओं को करना पड़ता है घूंघट!

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     उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर को भगवान शिव के बारह अद्भुत ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि महाकाल मंदिर के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कभी अकाल मृत्यु नहीं होती है, इसी वजह से यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इस मंदिर में भक्तों को भगवान शिव के दक्षिणमुखी अद्भुत ज्योतिर्लिंग के दर्शन होते हैं। महाकालेश्वर मंदिर मुख्यतः तीन भागों में विभाजित है, ऊपरी भाग में नाग चंद्रेश्वर मंदिर स्थित है और दूसरे हिस्से में ओंकारेश्वर मंदिर के दर्शन होते हैं, महाकालेश्वर के अद्भुत ज्योतिर्लिंग मंदिर के दर्शनार्थ हेतु आपको सबसे नीचे के हिस्से में जाना पड़ेगा जहाँ शिवपार्वती के साथ-साथ ही पुत्र गणेश व कार्तिकेय के भी दर्शन हो जाते हैं, इसी स्थान पर एक कुंड भी मौजूद है जिसमें स्नान करने से मनुष्य के समस्त पाप धुल जाते हैं।

दूषण नामक असुर से भक्तों को बचाने के लिए यहाँ साक्षात प्रकट हुए थे भगवान शिव

     एक पौराणिक किवदंती के अनुसार दूषण नामक असुर बहुत भंयकर व भयानक था जिससे उज्जैन प्रांत की समस्त जनता पीड़ित थी, जब उसे मारना किसी के लिए भी संभव न हुआ तब स्वयंभू भगवान शिव उज्जैन की धरा पर प्रकट हुए थे और दूषण नामक असुर वध किया था। दूषण नामक असुर के संहार के बाद उज्जैन की जनता ने भगवान शिव से उज्जैन में ही निवास करने का निवेदन किया था, मान्यता है! तभी से भगवान शिव उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर बसे उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में विराजमान हैं।

महाकालेश्वर मंदिर की अद्भुत है भस्म आरती

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     अगर आप महाकालेश्वर मंदिर के दर्शनार्थ हेतु जा रहे हैं तो सुबह की भस्म आरती में जरूर भाग लें, क्योंकि हर सुबह शिव को निद्रा से जगाने के लिए भस्म आरती का ही श्रृंगार किया जाता है, बताया जाता है कि जो श्रध्दालु जन शिव की इस भस्म आरती में सम्मिलित होते हैं उन पर भोले नाथ की विशेष कृपा दृष्टि हो जाती है जिससे वे भयानक अकाल मृत्यु से भी परे हो जाते हैं।

भस्म, है समस्त सृष्टि का 'सार,

भस्म पंचतत्वों का मूल है, समस्त चराचर जीवों के रूप, रस, सौंदर्य आदि के पीछे का छिपा 'सार, है। जीव का जब सर्वस्व जलकर खाक हो जाता है तब पीछे भस्म ही शेष रह जाती है और जो मृत्यु के बाद भी शेष रह जाता है वही सर्वदा सत्य की सत्ता है इसीलिए भगवान शिव को श्मशान की भस्म अति-प्रिय है। महाकालेश्वर मंदिर में पहले शिव की आरती के लिए श्मशान की असली भस्म का ही प्रयोग किया जाता था किन्तु अब जो भस्म आरती में प्रयुक्त होती है वह कपिला गाय के गोबर से बने कंडों, पीपल, पलाश, बेर आदि की लकड़ियों से तैयार की जाती है।

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