प्रेरक कथा! एक बहुत बड़े जंगल के पास, एक जादूगर रहता था। PRACTICAL LIFE.

प्रेरक कथा! एक बहुत बड़े जंगल के पास, एक जादूगर रहता था। PRACTICAL LIFE. 
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     इस जगत में यदि कुछ सत्य, शाश्वत व सनातन है तो वह है मर्त्यु! मर्त्यु ही अकेला एक ऐसा तत्व है जिसके बाबत निश्चिंत हुआ जा सकता है! परंतु जिसके प्रति निश्चिंत हुआ जा सकता है, जो भरोसे योग्य है, जो घटना घटनी अनिवार्य ही है मनुष्य उसी की उपेक्षा करता है। यहां सभी कुछ नश्वर है, यहां सभी कुछ मरण-धर्मा है, यहां सभी कुछ परिवर्तनशील है, यहां रूप कुरूप हो जाता है, यहां जवानी बुढ़ापे में परिवर्तित हो जाती है, यहां खूबसूरत चेहरे बदसूरत झुर्रियों में बदल जाते हैं। किंतु मर्त्यु कभी भी नहीं बदलती है वह जस की तस ही बनी रहती है, 

      मर्त्यु को कोई भी अंगीकार करना नहीं चाहता है। प्रत्येक को यही लगता है कि वह मरने वालों में से नहीं है, जो मरता है, जिसकी मर्त्यु आती है वह दूसरा है, जिसकी चिता मरघट में धू-धूकर जलती है वह कोई और है `मैं नहीं हूँ! लेकिन वह जो जलता है, जिसे आप मरघट पर जलाकर आते हैं, जिसे आप मिट्टी में दबाकर आते हैं वह कोई और नहीं है, वह आप ही हैं! भगवान बुद्ध कहा करते थे कि यदि किसी वृक्ष से कोई पत्ता भी टूटकर गिरता है तो जानना की तुम्हीं टूटकर गिरे हो। 

      एक बहुत बड़े जंगल के पास, एक जादूगर रहता था उसके पास सैकड़ों भेड़ें थीं उन भेंड़ों को वह उसी जंगल में चराया करता था और हर रोज एक भेंड़ को काटकर पका लिया करता था और अपने साथियों को आमंत्रित करके खूब मौज-मस्ती करता था। लेकिन भेड़ों को पकड़ने के लिए उसे बड़ी मशक्कत भी करनी पड़ती थी। जब वह किसी भेंड़ को काटने के लिए पकड़ना चाहता था तो वे सब जंगल में तितर-बितर हो जाया करती थीं। एक दिन उसने सभी भेड़ों को इकठ्ठा किया और उनसे कहा कि देखो, तुम कोई साधारण भेंड़ें नहीं हो, तुममें से बहुत सी भेंड़ें तो शेर हैं और कुछ चीता हैं, और कुछ तो बबरशेर भी हैं वह जो काटी जाती है, वह एक साधारण भेंड़ होती है, मैं सिर्फ साधारण भेड़ों को ही काटता हूँ! इसलिए तुम्हें भयभीत होकर भागना नहीं चाहिए। 

       उस दिन से तो जैसे चमत्कार ही हो गया! जादूगर मजे से एक भेंड़ को पकड़ता और उसे मार डालता दूसरी भेंड़ें बैठकर मजे से देखती रहती और यही समझती कि यह बेचारी एक साधारण भेंड़ थी इसलिए मारी गई, हम तो शेर हैं, हमें कौंन मारेगा भला! और यदि कोई मारने भी आयेगा तो ऐसा मारूंगी झपट्टा कि छठी का दूध याद आ जायेगा। उस दिन से कुछ भेंड़ें स्यमं को शेर समझने लगीं और कुछ चीता, कुछ बबरशेर समझने समझने लगीं लेकिन वे सब थीं साधारण भेंड़ें ही, यह तो जादूगर की एक तरकीब थी उन्हें पकड़ने के लिए, क्योंकि वह एक बूढ़ा इंसान था, ज्यादा भाग-दौड़ करना उसके लिए संभव न था। 
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      मनुष्य भी इसी तरकीब का शिकार हुआ है। मनुष्य के लिए जादूगर उसकी मर्त्यु है, प्राकृति है। यहां प्रत्येक यही समझता है! मैं तो इतना प्रसिद्ध हूँ, मैं कैसे मर सकता हूं! कोई समझता है मेरे पास इतना बड़ा मकान, इतना बड़ा पद् है, इतना बड़ा बैंक-बैलेंस है, मैं कैसे मर सकता हूं! लेकिन यह सिर्फ तरकीब है प्रकृति की, मर्त्यु की ताकि जब कोई मरे तब उसकी मर्त्यु देखकर तुम्हारे प्राणों में कोई कंपन न पैदा हो और तुम मजे से अपने सपनों में खोए रहो। 
     
     आँख खोलकर देखो, तुम्हारा भी नंबर आता ही है, तुम लाईन में ही खड़े हो, जिस लाईन का व्यक्ति मरघट में जल रहा है, तुम उससे अन्यथा नहीं हो। और लाईन रोज-रोज छोटी हो रही है, जादूगर के हाँथ जल्द ही तुम्हारी गर्दन को दबोच लेंगे। इससे पहले उसके हाँथ तुम्हारी गर्दन तक पहुँचे! आँख खोलकर देख लो, और भाग जाओ! नहीं तो वैसे ही तुम भी काटे जाओगे जैसे वे भेंड़ें काटी जा रही थीं। 


      
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