BHOOL KAR BHEE KISI STREE KO. भूल कर भी किसी स्त्री को मर्दानी न कहना !

सम्मान करना है तो स्त्री की शक्ति का, स्त्री की मौजूदगी का, स्त्री के समर्पण का, स्त्री के संघर्ष का, स्त्री की सहनशीलता का सम्मान करो! पुरूष की मर्दानगी स्त्रियों पर थोपना ठीक नहीं है,

https://www.paltuji.com/
https://www.paltuji.com/
      एक मेरा मित्र, दिल्ली में रहता था। सामने के मकान में एक नव-विवाहित महिला रहती थी। उस महिला की आवाज एकदम मर्दों जैसी थी, यानी इतनी भारी थी कि सुनने वाला यही समझाता था कि कोई पुरुष ही बोल रहा है। एक दफे तो यह हुआ कि उस महिला के पति का कोई प्रिय मित्र मिलने आया उसने दरवाजे से आवाज लगाई तो उस महिला ने कहा कि वो तो नहीं हैं, बाहर गए हैं! मित्र सोंचने लगा, यदि वो बाहर गए हैं तो यह दूसरा आदमी घर में क्या कर रहा है। मित्र ने महिला के पति से फोन करके पूछा कि घर में कोई रिश्तेदार आया है क्या? पति ने कहा कि नहीं धोखे में न पड़ो वह मेरी पत्नी है।

     एक दफे मेरा वहां जाना हुआ तो मेरा उस महिला से परिचय हो गया। वहां एक छोटी बच्ची भी रहती थी उसकी उम्र करीब सात-आठ वर्ष रही होगी, वह उस महिला को आंटी कहकर बुलाती थी। एक दिन वह मुझसे कह रही थी कि मेरी आंटी बहुत अच्छी हैं, मुझे बहुत प्यार करती हैं और चाॅकलेट भी देती हैं, तो मैंने ऐसे ही मजाक में कह दिया कि आपकी आंटी की आवाज भी बहुत अच्छी है, बिल्कुल अंकल जैसी! उस बच्ची ने जाकर महिला से यह कह दिया कि मैंने ऐसे-ऐसे बोला है। सुबह वह महिला अपने दरवाजे पर खड़ी मुझे घूर रही थी, मुझे देखकर कहने लगी कि 'लाला, मेरी आवाज़ ही नहीं मेरे हांथ भी अंकल जैसे हैं। मैं समझ गया, और मैंने उन्हें भी यह बात बता दी कि आपने जो कहा है वह मेरी समझ में आ गया है। दरअसल वह इस बात से बेहद खफा थी कि मैंने उसकी आवाज को पुरूष जैसा क्यों कहा! कोई भी स्त्री यह नहीं चाहती है कि कोई उसे पुरूष जैसा बताए।

किसी स्त्री को मर्दानी कहना, उसका अपमान है।


      किसी स्त्री को मर्दानी कहना भी ठीक नहीं है, जब हम किसी स्त्री को मर्दानी कहते हैं तब हमें यह ख्याल नहीं रहता कि हम उसका अपमान कर रहे हैं। रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर एक कविता लिखी गई है, बहुत प्रसिद्ध कविता है जिस लेखिका ने वह कविता लिखी है उनका नाम सुभद्रा कुमारी चौहान है। सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी कविता में लिखा है कि झांसी की रानी मर्दानी की तरह अंग्रेजों से लड़ी थी! 'खूब लड़ी मर्दानी, कविता में झांसी की रानी को मर्दानी बताया गया है और रानी को मर्दानी कहकर अपमान किया गया है। अगर झांसी की रानी जीवित होती और इस कविता के बाबत उन्हें पता चल जाता तो निश्चित ही उस लेखिका के प्रांण संकट में पड़ जाते। किन्तु यह कविता उनके न रहने पर गढ़ी गई, इसलिए वह अपमान, सम्मान में बदल गया और सुभद्रा कुमारी इसी कविता की वजह से प्रसिद्ध हो गयीं।
https://www.paltuji.com/
https://www.paltuji.com/
      आज मर्दानी शब्द स्त्रियों के लिए इतना पसंदीदा हो है कि लोग इसे स्त्रियों को उकसाने के लिए प्रयोग कर रहे हैं! जब कोई स्त्री किसी से झगड़ा-झांसा करती है तो उसका फोटो अखबारों में छाप दिया जाता है और लिख दिया जाता है कि यही वह मर्दानी है जिसने अपने पति पर लात-घूंसे बरसाये थे, इस तरह की खबरें जब महिलाएं पढ़ती हैं तब बड़ी गदगद होती हैं, उन्हें लगता है महिलाओं का बड़ा सम्मान हो रहा है, इसमें सम्मान वगैरह कुछ भी नहीं है यह ऐसे ही है जैसे छोटे बच्चों को नवस्कार करो और कहो कि तुम पुलिस स्पैक्टर हो, तो बच्चे खुश हो जाते हैं। और यदि भरोसा न हो तो किसी स्त्री को मर्दानी कहकर देख लेना, कह देना जब तुम झगड़ा करती हो तब मर्दों जैसी लगती हो, या जब चलती हो तो तुम्हारी चाल बिल्कुल मर्दानी लगती है, मुझे भरोसा है कोई भी स्त्री इससे स्यमं को सम्मानित नहीं अनुभव करेगी।

      सम्मान करना है तो स्त्री की शक्ति का, स्त्री की मौजूदगी का, स्त्री के समर्पण का, स्त्री के संघर्ष का, स्त्री की सहनशीलता का सम्मान करो! पुरूष की मर्दानगी स्त्रियों पर थोपना ठीक नहीं है, झांसी की रानी तो क्या किसी भी स्त्री को मर्दानी कहना उचित नहीं है, देवी कहो, दुर्गा कहो, काली कहो किन्तु मर्दानी न कहो यह अपमान है। 
https://www.paltuji.com/
https://www.paltuji.com/


Previous
Next Post »