(आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस या एआई) क्या है? Artificial intelligence artificial intelligence. what is it.

कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस या एआई) क्या है? Artificial intelligence artificial intelligence. what is it.

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     प्राकृति द्वारा उत्पन्न जीव-जंतुओं व मनुष्यों आदि में जो बुद्धि है वह प्राकृतिक है। कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस) वह बुद्धि कहलाती है जो मनुष्यों की बुद्धि द्वारा निर्मित की जाती है। यह जो कुत्रिम बुद्धि होती है, यह भी करीब-करीब वैसे ही कार्य कर पाने में समक्ष है जैसे प्राकृति द्वारा दी मनुष्यों की बुद्धि कार्य करती है। जब से कुत्रिम बुद्धि की खोज और उसकी संभावनाएं प्रकट हुई हैं, तब से यह शंका भी वैज्ञानिकों को होने लगी है कि हो न हो यह मानव बुद्धि भी किसी न किसी और महामानव की खोज हो! कुत्रिम बुद्धि की संभावनाएं देखकर यह शंका और भी बलवती होती जा रही है।

सोफिया रोबोट, दुनियां की सबसे स्मार्ट (मशीनी मानव)

     अभी हाल ही के दिनों में, हांगकांग की एक कंपनी हेनसन रोबोटिक्स (Hanson Robotics) द्वारा सोफिया नामक एक रोबोट (मशीनी मानव) बनाया गया है जिसकी सारी दुनियां में खूब चर्चा हो रही है। यह रोबोट अब तक की सबसे विकसित कुत्रिम बुद्धि की संभावनाओं को अपने भीतर समेटे हुए है। इसे अब तक के बनाए गए मशीनी मानवों में सबसे स्मार्ट मानव यन्त्र माना जा रहा है। रोबोट (सोफिया) की खूबियों और उसकी स्मार्टनेस को देखते हुए सऊदी अरब द्वारा देश की नागरिकता प्रदान की गई है। यानी सोफिया के साथ ठीक  वैसा ही व्यवहार किया जा रहा है जैसा किसी मनुष्य के साथ किया जाता है।

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सोफिया रोबोट की खूबियां!

     सोफिया रोबोट, लोगों से ठीक वैसे ही बातचीत करती है जैसे हम अपने दोस्तों के साथ बातचीत करते हैं। बताया जाता है वह मनुष्यों के 62, प्रकार के भावनात्मक संकेतों को भी पकड़ पाने और उन्हें काॅपी कर पाने में सक्षम है! उदाहरण के लिए, सोफिया से यदि क्रोध में भरकर प्रश्न पूछा जाय तो वह उसका उत्तर क्रोध में ही देती है, अश्लील व भद्दे प्रश्न पूछने पर वह नाराजगी भी जाहिर कर लेती है और डांट भी देती है। तमाम देशों में, बड़े-बड़े टीबी व अन्य प्रोग्रामों में उसका इंटरव्यू लिया जा चुका है, सभी जगह लोगों द्वारा उसकी खूब सराहना की गई है।

कुत्रिम बुद्धि मनुष्यता के लिए हो सकती है हानिकारक!

     सोफिया रोबोट की ईजाद के बाद कुत्रिम बुद्धि की जो संभावनाएं प्रकट हुईं हैं उन्होेंने इस विषय पर वैज्ञानिकों व बुद्धिजीवियों को दो गुटों में विभाजित कर दिया है। कुछ लोग इस तकनीक को मनुष्यों की सहयोगी मानते हैं और कुछ यह आशंका जाहिर करते हैं कि कुत्रिम बुद्धि का विकास एक सीमा तक ही उचित है, इस संबंध में बहुत एडवांस व विकसित तकनीक मनुष्यों के लिए ही हानिकारक हो सकती हैं। आशंका जाहिर करने वाले लोगों का तर्क है कि कुत्रिम बुद्धि का उच्चस्तरीय उपयोग  मनुष्यता के लिए हानिकारक इसलिए हो सकता है क्योंकि कुत्रिम बुद्धि में भी मनुष्यों की भांति ही भविष्य को लेकर चिंताओं की संभावनाएं पाई गई हैं। इसलिए इसकी संभावना बहुत है कि कुत्रिम मानव स्यमं की स्वतंत्रता के लिए मनुष्यों का वजूद ही समाप्त कर दे।
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कुत्रिम बुद्धि से मनुष्यता को नहीं है कोई खतरा!

     ऐसे मशीनी मानव जिन्हें कुत्रिम बुद्धि के साथ निर्मित किया जा रहा है वे कितने ही स्मार्ट क्यों न बना दिये जाएं किन्तु वे मनुष्यों के लिए खतरा कभी भी नहीं बन पायेंगे। सैमुलेशन थ्योरी, को यदि थोड़ी देर के लिए सच मान लें और यह समझ लें कि मनुष्य किसी दूसरे महामानव द्वारा निर्मित एक कठपुतली मात्र है तो यह कठपुतली इतनी सभ्य व एडवांस होने के बावजूद भी अभी तक उस महामानव द्वारा निर्मित एक भी इंद्रिय अथवा काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि पर नियंत्रण क्यों नहीं प्राप्त कर पाई, जबकि प्रत्येक इससे छुटकारा पाना चाहता है।

     यह जो मनुष्यरुपी कठपुतली है जो किसी दूसरे महामानव द्वारा निर्मित की गई है, यह चाहे कितनी ही एडवांस और स्मार्ट हो जाए किंतु जिस महामानव ने इसे गठित किया है यह उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगी। ठीक इसी प्रकार हम मनुष्यों की बुद्धि उस कुत्रिम बुद्धि के लिए महामानव जैसी है। कुत्रिम बुद्धि कितना ही उन्नति कर ले किंतु मनुष्यों का वह कुछ भी अहित नहीं कर पायेगी। ज्यादा से ज्यादा होगा यह कि यदि कुत्रिम मानव विकास की चरम सीमा छू लेगा तो वह मनुष्य हो जाएगा। क्योंकि वह उसी लीक (मार्ग) पर विकास करेगा जिस लीक पर मनुष्य चलता आया है, उससे अन्यथा वह मार्ग नहीं चुन सकेगा। मनुष्य जिस दिन विकास की सीमा छुएगा उस दिन वह वही महामानव बन जायेगा जिसके हाथों की वह अभी कठपुतली है, यह इस जगत का नियम है।
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     हम मनुष्यों में और हमें निर्मित करने वाले महामानव में, और हम मनुष्यों में और हमारे द्वारा निर्मित कुत्रिम मानवों में जो आसमानता है वह भी ख्याल में ले लेनी जरूरी है। हम जो कुत्रिम मानव बना रहे हैं उनमें चेतना या आत्मा जैसा कोई भी तत्व नहीं होगा वे चेतन तो होंगें किंतु उनकी चेतना भी उन्हीं की भांति बनावटी होगी, यह भेद भी उन्हें मनुष्यों की बराबरी नहीं करने देगा और यदि जैसा मैंने कहा कि किसी भांति यदि भविष्य में यह संभव भी हो जाए और जो कुत्रिम मानव हम बना चुके हैं उनमें चेतना या आत्मा जैसा तत्व प्रविष्ट हो जाय तो वह कुत्रिम मानव तत्क्षण मनुष्यों जैसा व्यवहार करने लग जाएगा। यही कुत्रिम मानव की विकसित अवस्था होगी और यह अवस्था मनुष्यों के लिए किसी भी भांति नुकसान पहुंचाने वाली नहीं होगी।






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