YESE KHULTI HAI TEESRI ANKH. ऐसे खुलती है तीसरी आंख!

ऐसे खुलती है तीसरी आंख! तीसरी आँख खोलने की यह है सबसे आसान विधि!
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  मनुष्य जब जन्मता है, तब वह अपने भीतर अनंत-अनंत संभावनाएँ 'possibilities, लेकर आता है, परंतु वे सभी संभावनाएँ सक्रिय अवस्था में नहीं रहती हैं! अर्थात एक्टिवेट 'activitie, नहीं रहती हैं। परंतु जो सक्रिय नहीं होती हैं उन्हें भी कुछ प्रयासों द्वारा सक्रिय किया जा सकता है। योग दर्शन में ऐसी तमाम क्रियाओं के बारे बताया गया है जिनके करने से उस संभावना को भी सक्रिय किया जा सकता है जिसे तीसरा नेत्र व तीसरी आँख कहा जाता है।

      जिस मनुष्य में यह तीसरे नेत्र की संभावना सक्रिय हो जाती है वह साधारण मनुष्यों की तुलना में बहुत ही विशिष्ट हो जाता है। उसकी देखने, सुनने व स्पर्श आदि करने की क्षमता सामान्य मनुष्यों से अनंत गुना बढ़ जाती है। वह भूत और भविष्य में घटने वाली घटनाओं को भी बड़ी स्पष्टता से देखने लगता है।

तीसरा नेत्र व शिव नेत्र किसे कहते हैं?

      ललाट पर दोनों भ्रकुटियों (भहों) के मध्य, ढाई अंगुल की गहराई में एक ग्रंथि होती है, आधुनिक भाषा में इसे 'पीनियल ग्रंथि, कहा जाता है। इसी गांठ को योग की द्रष्टि में तीसरा नेत्र, तीसरी आँख, अथवा शिव नेत्र आदि-आदि नामों से संबोधित किया गया है। प्राकृति की तरफ से अधिकांश मनुष्यों में यह ग्रंथि सुप्त अवस्था में ही रहती है। जीवन की वास्तविकता को जानने के लिए इस ग्रंथि का सक्रिय होना अति-आवश्यक है! इसको सक्रिय किए बिना कोई भी मनुष्य जीवन की वास्तविकता को नहीं जान सकता है वह भले ही अनंत ज्ञान रखने वाला क्यों न हो!

तीसरी आँख खोलने के लिए सबसे आसान प्रयोग:

      आँखों का स्वभाव चंचलता है, स्वभावत: मनुष्य की आँख किसी भी द्रश्य पर तीन सेकंड से ज्यादा नहीं टिकती है। यदि यह तीन सेकंड से ज्यादा टिकती है तो फिर यह टकटकी बन जाती है, फिर इसे देखना नहीं कहा जाएगा, फिर यह घूरना हो जाता है! तीसरी आँख खोलने की सबसे प्रभावी विधि यह है कि आप टकटकी का प्रयोग करें, द्रष्टि को एक विषय पर स्थिर करें! इसके लिए आप त्राटक प्रयोग कर सकते हैं।
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      सफेद कागज पर एक काला विंदु बनाएं, उसे दीवार पर चिपका लें, बुद्धासन में शरीर सीधा करके बैठ जांए! उस विंदु पर अपनी द्रष्टि स्थिर करें, बिना पलक झपके, एकटक उसे देखते रहें, जब आँखों में जलन होने लगे अथवा आँसू आने लगें तब इस प्रयोग को बन्द कर दें! अगले दिन पुन: इसे दोहराएं! यह प्रयोग चौबिस घंटों के मध्य कम से कम दो दफे अवश्य ही करना चाहिए। कुछ दिन यह प्रयोग करने से द्रष्टि स्थिर होने लगती है, जितनी स्थिरता बढ़ती है, तीसरी आंख उतनी ही शीघ्रता से खुलने लगती है।

तीसरी आँख खुलने से लाभ:

तीसरी आँख खुलने से अति-इंद्रिय अनुभवों का द्वार खुल जाता है। जिसकी तीसरी आंँख खुल जाती है वह व्यक्ति बिना आंख के ही घटनाओं को बड़ी आसानी से देख पाता है, दूसरे के मन के विचार पढ़ लेता है, भूत, भविष्य की घटनाओं को देख लेता है।

तीसरी आंख की वैज्ञानिकता:

     उदाहरण: समान्य आँखों के पास जो दृष्टि ऊर्जा होती है वह बहुत ही नाजुक है, साधारण कपडे़ को भी भेद पाना उसके लिए मुश्किल है। परन्तु तीसरी आँख की ऊर्जा इतनी सघन होती है कि वह किसी भी पदार्थ को बड़ी आसानी से भेद कर पार चली जाती है। जैसे एक्सरे की किरण होती है। एक्स-किरणें शरीर को भेद कर भीतर अस्थियों की फोटो खींच लाती हैं। एक्स-तरंगें, रेडियो-तरंगें और भी तमाम तरह की ऊर्जाऐं व तरंगें हैं जो स्वतंत्र रूप से आवर्त में भी गति करती हैं, और उनकी गति करने की गति भी बहुत ज्यादा होती है। तीसरी आंख में मौजूद ऊर्जा इसी प्रकार कार्य करती है, परन्तु उसकी क्षमता इन रेडियोधर्मी तरंगों से अनंत गुना अधिक होती है। 
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