Will the earth disappear from the earth? क्या मिट जायेगा पृथ्वी से मनुष्यों का वजूद?

दोस्तों, अगर आप भी इस पृथ्वी पर अनंतकाल के लिए रहने के सपने देख रहे हैं, तो मत देखिए, क्योंकि अब यह पृथ्वी ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है! अब इसका अंत लगभग सुनिश्चित हो गया है। 
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      विगत सौ वर्षों से, अंतरिक्ष में बढ़ती जीवन की खोजों ने इस संभावना को और भी बल दिया है। विज्ञान के क्षेत्र में सर्वाधिक प्रगति करने वाले अमेरिका व रूस जैसे मुल्क बड़ी ही गंभीरता से ऐसे ग्रहों-उपग्रहों की खोज में संलग्न हैं जहां पृथ्वी जैसा जीवन बसाया जा सकता है! सारी दुनियां में अंतरिक्ष को फतह करने की होड़ सी मची हुई है। बड़े-बड़े मुल्क करोड़ों डॉलर अपने अंतरिक्ष मिशनों को सफल बनाने के लिए खर्च कर रहे हैं। 

   अब इस पृथ्वी पर कब्जा करने की प्रतिस्पर्धा लगभग समाप्त हो चुकी है, अब लोग अंतरिक्ष में, ग्रहों-उपग्रहों पर कब्जा करने में ज्यादा उत्सुक हैं! और इस उत्सुकता का कारण यह है कि अब यह पृथ्वी मनुष्यता के लिए सुरक्षित स्थान नहीं रह गई है। इसलिए अब ऐसे ग्रहों-उपग्रहों की बड़ी तीव्रता से खोज हो रही जहां संकट की घड़ी में मनुष्यों को पहुंचा दिया जाय। पृथ्वी पर मड़राते इस खतरे की आशंका पहले भी कुछ लोग अनुभव कर चुके हैं।

      26,जनवरी 2008, को नार्वे में, नार्वेजियन सरकार द्वारा एक ऐसा 'बीज-बैंक, बनाया गया था जिसमें पांच लाख से भी ज्यादा बीजों को संरक्षित रखने की व्यवस्था की गई थी, अरबों-खरबों डॉलर की इस परियोजना में 'विल-गेट्स, जैसे पूंजीपति भी शामिल थे। 

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       इस परियोजना की शुरुंआत भी इसी ख्याल की वजह से की गई थी कि यदि भविष्य में पृथ्वी पर 'प्रलय, जैसे हालात बने तो यह संरक्षित बीज नष्ट नहीं होंगे और प्रलय शान्त होने के बाद पुनः यह बीज वर्क्ष बनकर जल्द ही इस पृथ्वी को हरा-भरा कर देंगें! इतनी बड़ी परियोजना को अंजाम देने का मतलब था कि विल-गेट्स और इस तरह की परियोजनाओं से जुड़े लोगों को पृथ्वी के नष्ट होने की संभावना की जानकारी मिल चुकी थी। 

      दुनियां में जो विचार प्रचारित किये जाते हैं, वे प्रमाणित और सत्य ही होंगें यह आवश्यक नहीं है! और दूसरों के विचार, दूसरों के रहस्य आप यदि प्रचारित भी करना चाहें तो भी नहीं कर पांयेंगे। इस जमीन पर निरंतर ऐसे गूंण प्रयोग हो रहे हैं जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। यदि वे रहस्य, वे सीक्रेट सार्वजनिक हो जाएं तो प्रतियोगिता भारी हो जायेगी। अभी इतनी प्रतियोगिता नहीं है। अन्य ग्रहों पर बढ़ती जीवन की खोज इस बात की पुष्टि करती है कि अब पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित नहीं है। इसलिए अमेरिका जैसे मुल्क बड़ी उत्सुकता से अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावनाएं तलाशने में लगे हैं। वर्तमान समय में अकेले मंगल ग्रह पर ही जीवन की संभावनाओं की खोज आठ 'अंतरिक्ष यानों, द्वारा की जा रही है। जिनमें सात यान अकेले अमेरिका के ही हैं, और आठवां यान भारत का है! 
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      अभी तक होता यह था कि पृथ्वी पर देशों के बीच एक दूसरे को गुलाम बना लेने की होड़ लगी रहती थी। लेकिन अब जो ताकतवर हैं, समझदार हैं उनकी दिलचस्पी पृथ्वी पर मौजूद किसी एक मुल्क को गुलाम बनाने में बिल्कुल भी नहीं है। वे अब चांद, मंगल या ऐसे किसी ग्रह को हधियाने की योजना में अपनी शक्ति व्यय कर रहे हैं, जहां का वातावरण मनुष्यों को बसाने के लिए अनुकूल हो! अभी तक खोजे गए ग्रहों व उपग्रहों में मंगल ही ऐसा ग्रह पाया गया है जहां मनुष्यता को बसाने की संभावनाएँ सबसे अधिक हैं, मंगल पृथ्वी के लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में मंगल के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने वाली है और जो इस प्रतिस्पर्धा में अग्रणीं होगा वही मंगल के सिंहासन का उत्तराधिकारी होगा, उसी के हांथ में सारी शक्ति होगी। उसके पास संपूर्ण पृथ्वी को गुलाम बनाने की क्षमता स्वत: ही आ जाएगी। 

      फिर वही तय करेगा कि पृथ्वी पर कितनी जनसंख्या रखनी है, कितनी नहीं रखनी है और वह जो बची हुई जनसंख्या होगी उसमें कितने अमीर होंगे और कितने गरीब होगे, कितनी महिलाएं होंगीं, कितने पुरूष होंगे, यह सब तय करने का अधिकार उसके पास होगा, वह एक तरह से इस पृथ्वी का ईश्वर होगा। इसलिए अब इस पृथ्वी पर सरहदों के लिए, खरौंदों के लिए आपस में ही कटने-मरने वाले लोगों को बड़ी सूझबूझ से कटना-मरना होगा, क्योंकि अब इस पृथ्वी के लिए लड़ना लगभग व्यर्थ हो चुका है। क्योंकि आने वाले समय में न यह पृथ्वी मेरी होगी और न तेरी होगी, यहां जो कुछ भी होगा वह सब उसका होगा! 

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