vajan kam karane ka sabase. वजन कम करने का सबसे चमत्कारिक और प्रमाणित तरीका..

वजन कम करने का सबसे चमत्कारिक और प्रमाणित तरीका सिर्फ इक्कीस दिनों में ही हो जाता है कायाकल्प! 

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Practical life 
     आज मनुष्य की समस्याओं में, मोटापे की समस्या का अपना अलग ही प्रभाव है। जहां ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के लोग मोटापे को स्वास्थ मानते हैं, वहीं खाते-पीते लोगों के लिए यह किसी 'नासूर, से कम नहीं है। ऐसी स्थिति में मोटापे की समस्या से निजात पाने के लिए लोग तरह-तरह के नुस्खे आजमा रहे हैं। लेकिन उन नुस्खों से किसी को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है, फिर भी नुस्खे सुझाने वाले लोग दावे के साथ उन नुस्खों को बेंच रहें हैं और मोटापे से पीड़ित लोगों को ठग रहें हैं। 

      अगर मोटापे की समस्या बन चुकी है आपके लिए भी नासूर, और ऐसे ही तमाम नुस्खे आजमाने के बाद भी नहीं हो रहा है फायदा तो यहाँ मैं बताने जा रहा हूँ एक ऐसा जबर्दस्त और प्राकृतिक तरीका जिसकी मद्त से आपका फालतू का मोटापा कुछ ही दिनों में झूमंतर हो जायेगा। मित्रों, जो लोग मोटापे की समस्या से पीड़ित हैं उन्हें सबसे ज्यादा चलने-फिरने की सलाह ही अधिक मुहैया करायी जाती है। लेकिन उससे सिर्फ मोटापा खत्म होने की भ्रांति होती है, मोटापा जस का तस ही बना रहता है। 

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Practical life 
     शरीर की एक स्वाभाविक आदत है कि वह क्रिया करने के लिए सदा ही तत्पर रहता है। वह कुछ न कुछ करना ही चाहता है, ऐसी स्थिति में भाग-दौड़ करना भी उसकी आदत का हिस्सा बन जाता है, इसलिए वह भाग-दौड़ भी व्यर्थ हो जाती है। अगर आप कुछ ऐसा करते हैं जिसे शरीर आदत के रूप नहीं ढाल सकता तो वह 'करना, निश्चित ही आपके शरीर को रूपांतरित करेगा। 

कुछ न करने का नाम ध्यान है। 

    ध्यान ऐसी औषधि है, ऐसा उपाय है जिससे मोटापा तो क्या जीवन-मरण जैसी बड़ी से बड़ी व्याधि भी सदा-सदा के लिए समाप्त हो जाती है। लेकिन इसे करने में सबसे बड़ी कठिनाई यही है कि इसमें कुछ करना नहीं होता है सिर्फ और सिर्फ एक स्थान पर बैठना होता है, जो बड़ा कठिन कार्य मालुम पड़ता है। मनुष्य करने के नाम पर कुछ भी कर सकता है और अनंतकाल तक कर सकता है, किन्तु वगैर कुछ किए हुए एक क्षण बैठना बड़ा मुश्किल हो जाता है। 

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यह प्रयोग सभी के लिए है। 

      सुबह नित्य-क्रिया व स्नान आदि करने के बाद जैसे बुद्ध बैठें हैं, शांत, मौन रीढ़ सीधी किए हुए, ऐसे बैठ जांए, कुछ करें न, करना तो बहुत हो चुका! कोई मंत्र भी न बुदबुदाएं, मन बहुत करेगा कि कुछ जपो, गायत्री मंत्र या हनुमान चालीसा ही पढ़ो! लेकिन आप मन से कह दें कि यह बहुत हो चुका आज कुछ 'न, करने दो, आज क्षमा करो। रीढ़ सीधी रखें, और अपना सारा ध्यान नासिका के अग्र-भाग पर केंद्रित रखने का प्रयास करें, अर्थात अपनी नाक का ऊपरी भाग देखने की कोशिश करें। और ख्याल रखें कि यह बड़ा कठिन कार्य है, कठिन इसीलिए है कि इस प्रक्रिया में कुछ करना नहीं है सिर्फ देखना है। यह जो खाली बैठने का प्रयोग है इसे शुरूआंत में आप ज्यादा देर तक नहीं कर पायेंगे, इसलिए इसका पहले आधे-आधे घंटे तक ही अभ्यास करें। 

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     यदि इतना भी आप नियमित रूप से दिन में दो दफे तीन सप्ताह तक कर ले जायेंगे तो निश्चित ही आपके शरीर से अतिरिक्त भार समाप्त हो जायेगा। और आप एक सामान्य व सुड़ौल शरीर के स्वामी बन जायेंगे। करने से जो वर्षों में नहीं हुआ वह न करने से कुछ ही दिनों में हो जाएगा। दोस्तों, यह बड़ा ही कारगर और प्रमाणित प्रयोग है, इसे अवश्य करें! और यह जान लें कि मन इसे जल्दी स्वीकार नहीं करेगा, मन कहेगा! क्या खाली बैठकर नाक देखोगे, नाक में क्या रखा है, बाहर निकलो सड़क पर दौड़ो, सब सड़क पर दौड़ते हैं। लेकिन मैं अनुभव से कहता हूँ कि जो बाहर नहीं मिलता वह घर में मिल जाता है, जो दौड़कर नहीं प्राप्त होता, वह बैठकर प्राप्त हो जाता है, यही परमात्मा का रहस्य है। 

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