SUKRAAT KO JAHAR DEKAR KYON MAAR DALA GAYA. सुकरात को जहर देकर क्यों मार डाला गया? PRACTICAL LIFE

सुकरात को जहर देकर क्यों मार डाला गया, जानें  उनके जीवन-दर्शन की कुछ अनूठी बातें!

https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
     दोस्तों, इस जगत की भीड़ का एक शास्वत नियम है कि यहाँ जो भी व्यक्ति सत्य कहने का साहस करता है उसे या तो जहर देकर मार डाला जाता है या झूठे आरोप मढ़कर उसे सूली पर चढ़ा दिया जाता है। क्योंकि यह जगत की भीड़ जीवित है असत्य के सहारे, झूठ और कपट के सहारे, असत्य, झूंठ, चोरी, धोखा यही सब इस भीड़ का भोजन है। इसलिए इस भीड़ ने एक नियम बना रखा है और वह यह है जो व्यक्ति असत्य, झूंठ, चोरी, धोखाधड़ी जैसी बिमारियों को पोषता, उन्हें सींचता है उसे यह भीड़ खूब सम्मान देती है, उसे अपने सिर पर बैठा लेती है। लेकिन जो जगत की वास्तविकता से अवगत कराते हैं उन्हें यह भीड़ घेरकर मार डालती है। 

     सुकरात का जन्म ईसा पूर्व करीब 470/469 ईसवी में युनान की राजधानी एथेंस में एक गरीब घर में हुआ था। बचपन से ही उनमें जानने की जिज्ञासा बहुत प्रबल थी। वे सुनी-सुनाई बातों पर कभी भरोसा नहीं करते थे। वे लोगों को समझाते थे कि सत्य वह नहीं है जिसे लोग सत्य माने बैठे हैं। यदि ठीक समय पर ठीक प्रयत्न किया जाय तो उसे अवश्य ही जाना सकता है जो वस्तुत: सत्य है। 

     गरीब परिवार में जन्म लेने के बावजूद भी उनकी ख्याति दिन पर दिन बढ़ने लगी थी। एथेंस के युवा सुकरात की बातों से बहुत अधिक प्रभावित थे। लेकिन युनानी पंडित सुकरात से बहुत नाराज थे, उन्होंने यह खबर फैलानी शुरूं कर दी कि सुकरात हमारी युवा पीढ़ी को बरगला रहा है, यह बात भीड़ को भी जंच गई और इस षडयंत्र के तहत सुकरात को गिरफ्तार करवा दिया गया। गिरफ्तारी के बाद जिस दिन यह निर्णय होना था कि सुकरात दोषी हैं या नहीं, उस दिन हजारों लोगों की गवाही ली गई लेकिन एक भी गवाही सुकरात के पक्ष में नहीं थी। परिणाम-स्वरूप उन्हें स्यमं ही जहर पीकर मरने का फरमान सुना दिया गया। 

https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
     कहते हैं, जिस जेल में उन्हें रखा गया था उस जेल के कर्मीं अथिकांश युवा ही थे और वे सभी बहुत दुखी थे। उन्होंने सुकरात के समक्ष यह प्रस्ताव भी रखा था कि वे इस कारागृह से भाग जाएं। लेकिन सुकरात इस प्रस्ताव से राजी नहीं थे, क्योंकि वे जान चुके थे कि शरीर तो मरणधर्मा है। उन्होंने जेल-कर्मियों को धन्यवाद कहते हुए कहा था कि मर्त्यु सब जगह है, यह देह भी एक कैदखाना है, जब-तक आत्मा इस देह में बद्ध है तब-तक समझो वह कारावास में ही कैद है। मैं, सौभाग्यशाली हूँ जो इस घटना से मुझे इस शरीर रूपी कारावास से मुक्त होने का अवसर मिला है, इसलिए हे मित्रों, तुम दुखी न होओ, मेरा सिर्फ शरीर ही नष्ट होगा, तुम्हारे प्रति जो मेरा प्रेम है उसका कभी नाश नहीं होगा। 

     सुकरात को जेल के भीतर ही भोजन के समय मीठे जहर का प्याला दिया गया। जो युवा जेलर उसे जहर का प्याला देने आया था उसके हांथ थर-थर कांप रहे थे और उसकी आंखें आंसुओं से सराबोर थीं। सुकरात ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोला 'जरा सभांल कहीं यह प्याला छलक न जाएं, और तुझे अपने हुक्मरान से दंडित होना पड़े। सुकरात ने जेल के भीतर से ही हांथ बढ़ाकर वह प्याला स्यमं के हाथों में ले लिया और उस युवक को धन्यवाद कहकर हंसते-हंसते उस मीठे जहर को पी गए। 

https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
 सुकरात का अपनी पत्नी के प्रति प्रेम:

     प्रैक्टिकल लाइफ में, ऐसे बहुत ही कम सौभाग्यशाली लोग होते हैं जिनकी प्रतिभा का पता उनकी पत्नी को चलता है, सुकरात उन सौभाग्यशाली लोगों नहीं थे। उनकी पत्नी बहुत ही झगड़ालू प्रवृत्ति की थी, सुकरात जब ध्यान के लिए आसन लगाकर बैठते थे तो वह पीछे से आकार 'लात, मार दिया करती थी। मित्रों ने कई दफे सुकरात को यह सलाह भी दी थी कि वे इस स्त्री को त्याग दें। लेकिन सुकरात कहते कि यदि मैं इसे त्याग दूंगा तो यह किसी अन्य को लात मारेगी और वह अन्य मैं नहीं होऊंगा, इसलिए इस बात की संभावना अधिक है कि वह व्यक्ति इसकी लात ही तोड़ दे! वे कहते मेरा, मेरी पत्नी के प्रति प्रेम ऐसा है कि मैं, इतनी हानि उसे नहीं पहुंचा सकता हूं। 

https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
     एक युवक ने सुकरात से पूछा था कि मैं विवाह करना चाहता हूं! आपका क्या सुझाव है? सुकरात ने कहा तुम्हें विवाह अवश्य ही करना चाहिए। क्योंकि पत्नी यदि समझदार होगी तो तुम्हारा जीवन सुखमय बन जाएगा और यदि मेरी पत्नी की भांति झगड़ालू हुई तो तुम मेरी तरह सुकरात बन जाओगे! दोस्तों, सुकरात को भले ही जहर देकर मार डाला गया था, लेकिन उनके जानने की जिज्ञासा व उनके दर्शन ने पूरे पश्चिम की चेतना को रूपांतरित कर दिया था। सुकरात के दर्शन ने पश्चिम की बुद्धिमत्ता को रूढ़िवादी मानसिकता से मुक्त होने में भी सहायता की है। आज यह जो पश्चिम ने ऊंचाइयां प्राप्त की हैं, इसमें सुकरात के विचारवादी दर्शन की बहुत बड़ी भूमिका है। 

https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 








Previous
Next Post »