BANDAR AUR AADMI ME SAMAANTA. बंदर और आदमी में समानता, त्योहारों पर लोग ज्यादा शराब क्यों पीते हैं।

   
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बंदर और आदमी में समानता क्या है? 

     डार्विन कहता है, मनुष्य परमात्मा का अवतार नहीं है, वह एक खास प्रजाति के बंदरों से विकसित हुआ प्रांणीं है। भारत यह बात पूर्व से ही जानता है, यह जो बंदरों की मर्त्यु हो जाने पर मनुष्यों जैसी क्रियाएं की जाती हैं, यह अकारण नहीं है, यह इस बात का सबूत है कि बंदर मनुष्य के ही पूर्वज हैं और मनुष्य सदा से ही बंदरों को अपना पूर्वज मानता आया है।


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     कुछ तथ्य ऐसे भी सामने आएं हैं जिनसे यह प्रमाण भी पुख्ता होते हैं कि मनुष्य बंदरों के अतिरिक्त 'सुअरों, से भी विकसित हुआ होना चाहिए। क्योंकि सुअरों का डीएनए और सुअरों की रसायनिक संरचना करीब-करीब  मनुष्यों जैसी ही है। 'क्लोनिंग, करने वाली कंपनियां मनुष्यों के गुर्दा-पथरी जैसे अंग सुअरों के भीतर ही विकसित करते हैं और फिर बाद में उन्हें मनुष्यों के भीतर ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है।

     चार्ल्स डार्विन ने ऐसे बहुत से प्रमाण प्रस्तुत किए थे जिनकी वजह से उसकी दलील को खारिज नहीं किया जा सका। उसने मनुष्यों के शरीर में गुदा द्वार के ऊपर वह स्थान भी बताया था जहां पूंछ हूआ करती थी और वह निशान आज भी उसी स्थान पर मौजूद है। यह जो झीना-झपटी की भावना है यह मनुष्यों को बंदरों से ही विरासत के रूप में मिली है। 

     बंदर सारा दिन झीना-झपटी ही करते रहते हैं, झीना-झपटी के मामले में बंदरों और मनुष्यों का कोई मुकाबला नहीं है। एक से एक धनी व्यक्ति भी झीनाझपटी की भावना से नहीं मुक्त हो पाते। इसलिए झीनाझपटी करने वाले लोगों पर जब आरोप लगता है तो हम उसे 'बंदर-बांट, कहते हैं, यह जो जमीन-ज्यादत और आवास हड़पने के मुकदमें मनुष्यों की अदालतों में चलाए जाते हैं इनके पीछे बंदरों का ही स्वभाव काम करता है। इससे इस सबूत को और बल मिलता है कि बंदरों का स्वभाव अभी भी मनुष्यों को ढोना पड़ रहा है।

सुअर और मनुष्य में समानता:

     सुअर ऊपर से देखने में भले ही गंदा है, दुर्गंध आती है, लेकिन वह भीतर से मनुष्यों के बहुत करीब है। इतना करीब है कि अब सुअरों के भीतर वैज्ञानिकों द्वारा मनुष्यों के अंग विकसित किए जा रहे हैं। और हैरानी की बात तो यह है कि जब वे अंग मनुष्यों के भीतर प्रत्यारोपित किये जाते हैं तो उन अंगों को स्वीकार करने में मनुष्यों का शरीर किसी भी प्रकार का विरोध नहीं करता है और वे अंग ठीक तरह से अपना कार्य करने लगते हैं। 

     सुअर और मनुष्य के बीच और भी तमाम तरह की समानताएं हैं। जैसे सुअर को गंदगी बहुत प्रिय है कहना चाहिए गंदगी उनकी 'फेवरिट, है। ऐसे ही मनुष्य भी गंदगी प्रिय प्रांणी है लेकिन यह स्वभाव ज्यादातर पिछड़े, ग्रामीण, गवांरों में ही अधिक देखा गया है। ऐसा लगता है यह जो गंदगी प्रिय लोग होते हैं यह सुअरों के ही वंशज है।  



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