PRACTICAL LIFE. इस ग्रह की उपासना स्त्रियों के लिए है विशेष लाभदायी, पूर्ण होती हैं सभी मनोकामनाएँ!

इस ग्रह की उपासना स्त्रियों के लिए है विशेष लाभदायी, पूर्ण होती हैं सभी मनोकामनाएँ! 

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     प्रिय, शास्त्रों में गुरू-बृहस्पति का अपना अलग ही स्थान है, बृहस्पति को देवताओं का गुरू भी माना जाता है। मान्यता है, यदि गुरू की स्थिति जन्म कुंडली में शुभ हो तो वह सभी ग्रहों के अनिष्टों का नाश करने वाली होती है। जिन व्यक्तियों पर बृहस्पति की कृपा-दृष्टि होती है वे ज्ञानी, ध्यानी और परोपकारी होते हैं। इस ग्रह से प्रभावित स्त्रियाँ मिलनसार, गंभीर विषयों को जानने वाली, एक पुरुष प्रेम की इच्छा रखने वाली व गंभीरता से अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली होती हैं।

बुद्धि और ज्ञान में भिन्नता :

     यहां एक बात और बताना चाहूँगा जिसे जानना भी जरूरी है और वह यह कि बुद्धि और ज्ञान ये दो अलग-अलग विषय हैं। बुद्धि का संबध बुद्ध ग्रह से है और ज्ञान का संबंध बृहस्पति से है। बुद्ध अगर शुभ होगा, उसकी कृपा यदि फलदायी होगी तो ऐसा व्यक्ति बुद्धि के मामले में बहुत प्रखर होगा, उसकी याददाश्त का कोई हिसाब न होगा, वह जिस विषय को एक दफे पढ़ लेगा वह विषय उसके मानस पटल पर सदा-सदा के लिए अंकित हो जायेगा। अगर हम इसे और आधुनिक भाषा में समझें तो उसके ब्रेन की पावर और उसकी मैमोरी का स्पेस बहुत ज्यादा होगा, इस वजह से वह चीजों को ज्यादा दिन तक संग्रहित रख सकेगा। लेकिन ऐसे व्यक्ति को अनुभव एक धेले का भी नहीं होता है, क्योंकि अनुभव जो है वह  बृहस्पति की कृपा से ही संभव होता है।

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उदाहरण :

     उदाहरण के लिए समझें, जैसे आज देखतें हैं बहुत छोटे-छोटे बच्चे बिना देखे कथा-भागवत कहतें हैं या संस्कृत के श्लोक आदि रटते रहते हैं, या कौंन बनेगा करोड़पति जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर लोगों को दातों तले अंगुली दबाने के लिए विवश कर देते हैं। या हमारे घरों में कभी-कभी दो-तीन साल के छोटे होते हैं वे भी कभी-कभी ऐसी-ऐसी बुद्धिमानी की बातें कह जाते हैं जिन्हें सुनकर हम चकित रह जाते हैं। यह जो कुछ भी होता है यह सब बुद्ध की कृपा से ही होता है।

     बृहस्पति की कृपा होने से व्यक्ति बुद्धिमान तो हो ही जाता है और साथ ही बुद्धि में अनुभव भी जुड़ है जिसे हम विवेक भी कह सकते हैं। बिना विवेक व अनुभव के बुद्धि ऐसे ही है जैसे बिना लगाम के घोड़ा! इसलिए बुद्ध का उतना महत्व नहीं है जितना गुरू-बृहस्पति का है। इसलिए बृहस्पति को ही प्रसन्न करने की अधिक आवश्यकता है।

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गुरू-बृहस्पति की कृपा का प्रभाव विशेषकर स्त्रियों पर बहुत शीघ्रता व बहुत प्रबलता से होता है। 

     गुरू-बृहस्पति की कृपा का प्रभाव विशेषकर स्त्रियों पर बहुत शीघ्रता व बहुत प्रबलता से होता है। क्योंकि जैसा मैंने कहा कि विवेक का प्रतिनिधित्व बृहस्पति के ही जिम्मे है और विवेक यह भलीभांति जानता है कि समस्त संसारिक सुखों का प्रारंभ परिवारों की सुख-समृद्धि से ही होता है। जिसके जीवन में परिवारिक सुख नहीं है, रोजमर्रा की झिक-झिक है, कलह है, पत्नी लाल मिर्च की शौकीन है, पति को हरी मिर्च भी खाना मना है तो आप समझ सकते हैं कि उस घर की दशा क्या होगी? उस घर में जो बुद्ध की बुद्धि होगी वह विक्षिप्त हो जायेगी और वह आत्म-हत्या कर लेगी, मैंने एक से एक बुद्धिमान व्यक्ति देखें हैं जो परिवारिक कलह के कारण अपनी इहलीला समाप्त कर चुके हैं। 

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गुरू की प्रसन्नता के लिए करें यह कार्य:

     जिस तरह विवेक का प्रतिनिधित्व बृहस्पति के जिम्मे है उसी तरह परिवारों की प्रतिनिधि स्त्रियाँ होती हैं, इसलिए परिवारों की सुख-समृद्धि व स्त्रियों की मनोकामनाओं की पूर्ति पर गुरू-बृहस्पति की विशेष कृपा रहती है। अगर आप भी पाना चाहती हैं वह जिसके देखती हैं सपने तो गुरु-बृहस्पति को प्रश्न करें! उनकी प्रश्नता के लिए आप नियमित रूप से निराहार रहकर शुभ मन से बृहस्पतिवार व्रत रख सकती हैं, बृहस्पतिवार के दिन पीली वस्तुओं का दान कर सकती हैं। यदि यह कुछ भी संभव न हो तो माता-पिता, सास-ससुर व बड़े-बुजुर्गों की सेवा आदि करके उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं। क्योंकि बृहस्पति पूर्वजों के भी कारक होते हैं। ऐसा करने से बृहस्पति को बहुत खुशी मिलती है और उनकी खुशी में ही हमारी कृपा का बीज छुपा है। यदि इस विषय से संबंधित कोई प्रश्न अथवा सुक्षाव हो तो अवश्य साझा करें! 
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