NASHA, JUA, JHAGRA, MARPEET. नशा, जुआ, झगड़ा, मारपीट जैसे व्यसन मनुष्य क्यों करता है।

नशा, जुआ, झगड़ा, मारपीट जैसे व्यसन मनुष्य क्यों करता है।

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Practical life 
मनुष्य दो तरह की संभावनाओं के लिए स्वतंत्र है। एक उसके भीतर बुद्ध की भांति परम जागरण को उपलब्ध होने की संभावना है और दूसरा पशुओं की भांति परम मूर्छा में जीने की भी संभावना है। 

    जब कोई मनुष्य शराब पीता है तब वह मूर्छित होने के लिए ही पीता है, बेहोश होने के लिए ही पीता है। शराब पीने के बाद वह पशुओं की स्थिति में पहुंच जाता है। फिर उसका कोई परिवार नहीं रहता, समाज नहीं रहता, बुद्धि नहीं रहती फिर उसके लिए लिए नियम-कानून भी नहीं रहते। वह पूर्णतः पशु ही हो जाता है। 


     इसलिए वह शराब के नशे में ऐसा व्योहार भी कर पाता है जैसा कोई पशु करता है। फिर हम भी उसके साथ पशुओं जैसा ही बर्ताव करते हैं। लेकिन यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रहती, थोड़ी देर में नशा उतरता है और वह व्यक्ति पुन: चेतन हो जाता है फिर बुद्धि लौट आती है, फिर समाज, परिवार, और नियम-कानून जीवित हो जाते हैं। फिर वह स्यमं को उसी दलदल, उसी पीड़ा में लिप्त पाता है।

     नशे के प्रति लोगों का जो आकर्षणं है वह सिर्फ इसीलिए है कि नशा थोड़ी देर के लिए व्यक्ति को वापस पशु बना देता है। थोड़ी देर के लिए वह पशुओं जैसी स्वतंत्रता, पशुओं जैसी शान्ति को उपलब्ध हो जाता है, नशे की हालत में वह कहीं भी नाली या सड़क पर पड़ा रह सकता है, लेकिन बिना मूर्छित हुए उसे मुश्किल होती है। जो लोग नशे का विरोध करते हैं उनके विरोध करने का सबसे बड़ा कारण यही होता है कि वे व्यक्ति को पशु होने की स्थिति में जाने रोकते हैं।

     खास त्योहारों के मौकों पर सर्वाधिक लोग नशे में धुत्त देखे जाते हैं। इन मौकों पर ज्यादातर लोग पशु ही होते हैं। इसलिए इन मौकों पर अन्य दिनों की तुलना में ज्यादा अपराध देखे जाते हैं। पहले शराब की दुकानों पर यह विशेष तौर पर स्वतंत्रता रहती थी कि झगड़ा-झांसा करने वाले लोगों को अपराधी नहीं माना जाता था, क्योंकि प्रशासन भी इस बात को जानता था कि पशुओं को अपराधी मानना ठीक नहीं है। लेकिन अब इस पर भी प्रतिबंध लग चुका है, अब पशुता कहीं भी स्वीकार्य नहीं है, और आप भी इसे स्वीकार न करें। 


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Practical life 
     एक शराब और भी है, एक नशा और भी है जो जागरण का नशा है, जो परमात्मा की शराब है वह जब चढ़ता है तो बस चढ़ता ही है, फिर नीचे नहीं उतरता है। प्राकृति का नियम है आगे गति करना नाकि पीछे घसिटना, और यदि कोई पीछे लौटना भी चाहे, फिर से पशु होना भी चाहे तो भी यह संभव नहीं है, यह थोड़ी देर के लिए ही नशे के माध्यम से संभव हो पाता है।

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