HIMBA MAHILANYE ETNI SUNDAR KYON HAIN. जानिए हिम्बा महिलाओं की खूबसूरती का राज क्या है?

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आज अफ्रीका के नार्थ नामीबिया के कुनैन प्रांत में रहने वाली हिम्बा जनजाति की महिलाएं सारी दुनियां के लिए आकर्षण का केंद्र बनीं हुई हैं।

     दोस्तों, स्त्रियों के सौंदर्य की कोई परिभाषा नहीं होती है। कालीदास की नजर में जो स्त्री के सौंदर्य की परिभाषा है वही परिभाषा शेक्सपियर की नजर में भी होगी यह जरूरी नहीं है। कालीदास से पूछेंगे कि स्त्री के सौंदर्य के बाबत कुछ कहें तो वे कहेंगे कि जिसके पके कुंदरू जैसे लाल होंठ हों, छरहरा बदन हो, जिसकी कमर पतली हो, जो हिरनी की तरह चलती हो, जिसकी गहरी नाभि हो, जिससे अपने स्तनों का भार संभाला न जाता हो,जिसके नुकीले व चमकदार दांत हो और जो श्रोंणि के भार के कारण बहुत भारी कार्य न कर पाती हो ऐसी स्त्री मानो सौंदर्य की देवियों में भी महान है। 

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     देश बदलता है, काल बदलता है, रीति-रिवाज बदलते हैं उन्हीं के साथ-साथ परिभाषाएं भी बदलती हैं। दक्षिण कोरिया में बी.आकार वाली स्त्रियों को श्रेष्ठ सुन्दरता का खिताब प्राप्त है, वहां की लड़कियां तमाम पैसे खर्च करके सर्जरी के माध्यम से अपने चेहरे के आकार को V के आकार में ढलवाती हैं। बहुत पहले चीन में सुंदर स्त्री की पहचान उसके छोटे पैरों को देखकर की जाती थी, यानी जितने छोटे पैर उतनी खूबसूरत स्त्री। लड़कियों को सुंदर दिखाने के लिए उन्हें कम उम्र से ही लोहे से बनीं जूतियां पहना दी जाती थीं। जिनकी वजह से उनके पैर सिकुड़ जाते थे और वह लड़की सौंदर्य की मूर्ति बन जाती थी।

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      परिभाषाओं का उतना मूल्य नहीं है, जितना आकर्षंण का है। आज अफ्रीका के नार्थ नामीबिया के कुनैन प्रांत में रहने वाली हिम्बा जनजाति की महिलाएं सारी दुनियां के लिए आकर्षण का केंद्र बनीं हुई हैं। उन्हें दुनियां की सबसे खूबसूरत महिलाएं भी बताया जाता है। इनकी खूबसूरती व आकर्षंण का कुल कारण इतना है कि अब गोरे लोग, गोरी चमड़ी वाली खूबसूरती से बुरी तरह ऊब चुकें है, गोरी महिलाएं भी अब गोरे पुरुषों में आकृष्ट नहीं हैं। विश्व भर में अमेरिका जैसे देशों का ऐसा प्रभुत्व है कि अगर वे गोबर को भी कहें कि 'गुड़, है तो सारी दुनियां उसे खाने के लिए दौड़ पड़ती है।

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      हिम्बा आदिवासी अति-पिछड़ी हुई बिरादरी है। न रहने के लिए घर है, न खाने के लिए पर्याप्त भोजन है। सत्तर-अस्सी के दशक में इस कौम के लोग व बच्चे इतनी बत्तर हालत में हो जाते थे कि गिद्ध जैसे मांसाहारी पक्षी उन्हें नोच-नोचकर अपना नेवाला बना लेते थे। यह कौम ज्यादातर नंग-धड़ग ही रहती है।

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हिम्बा जनजाति के रीति-रिवाज:

      इस समाज में महिलाओं को स्नान करने की मनाही है, वे सिर्फ अपने विवाह के दिन ही स्नान कर पाती हैं। अन्य दिनों में वे स्यमं को तरोताजा रखने के लिए कुछ खास प्रकार की जड़ी-बूटियों से निर्मित लेप का ही प्रयोग करती हैं! इसी लेप की वजह से उन्हें 'रेड वूमन, भी कहा जाने लगा है, क्योंकि यह लेप लगाने के बाद वे गेरूए रंग में बदल जातीं हैं। इस समाज की महिलाओं का बाल बांधने का तरीका भी बड़ा अनूठा है। वे बालों में जूड़ा बनाने के लिए इसी गेरूए लेप का प्रयोग करती हैं, इस लेप की सहायता से वे बालों को पतली-पतली जटाओं में पिरो देती हैं, जो देखने में बड़ा ही अद्भुत लगता है।

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     विश्व में जितनी भी पिछड़ी, जंगली, आदिवासी कौमें हैं वे सब प्राकृति के नियमानुसार ही कार्य करती हैं। सामाजिक नीति-नियम व रीति-रिवाज उनके ऊपर कार्य नहीं करते हैं। हिम्बा समुदाय में भी एक से अधिक महिलाओं व पुरुषों से काम-संबंध बनाना कोई अपराध नहीं माना जाता है, बस शर्त इतनी है कि वह सहमति से बनाया गया हो! 
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