BODY REVIEW. SAREERIK SMICHA. काया की कड़वी सच्चाई।


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प्रिय  

     यह सत्य ही जानों कि - मल-मूत्र, शुक्र और आद्र नाड़ियों से व्याप्त, त्रिविध प्रकार के विकारों से युक्त और पतनशील यह जीव-देह जगत में सिर्फ दुख-भोग के लिए ही प्रकाशित हो रही है। 

     स्त्री-पुरुष के संयोग से यह शरीर उत्पन्न होता है। इसे चेतन-रहित और नर्क के भांति ही जानो! मूत्र-द्वार से निकलने वाला यह शरीर हड्डियों से गठित किया गया है, मांस से लीपा गया है, और विष्ठा, मूत्र, वात, पित्त, कफ, मज्जा, चर्बी से भरपूर यह देह मानो सब प्रकार की दूषित वस्तुओं का भंडार घर है। 

     यह शरीर बुढ़ापे के समय बुढ़ापे को और मर्त्यु के समय मर्त्यु को अवश्य ही प्राप्त होता है, यह नियम भाग्यवान और दरिद्र दोनों के लिए समान हैं। 




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