RAVAN NE YAHAN BANAI THEE. रावण ने यहां बनाई थी स्वर्ग की सीढ़ी!

रावण ने बनाई थी ऐसी सीढ़ी, जिससे पापी भी जा सकते थे स्वर्ग!

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      कहते हैं! परमात्मा ने स्वर्ग की रचना देवताओं के लिए की थी और नर्क दानवों के लिए, बनाया था। परन्तु लंकापति रावण इतना शक्तिशाली था कि उसने दानवों के लिए भी स्वर्ग में जाने की योजना बना डाली थी। रावण यह भलीभांति जानता था कि उसकी मर्त्यु श्रीराम के हाथों होना निश्चित है। परंतु वह यह कभी नहीं चाहता था कि उसकी मर्त्यु के साथ-साथ अन्य दानवों का भी खात्मा हो जाए! इसलिए वह पृथ्वी से सीधे स्वर्ग में प्रवेश करने के लिए एक ऐसी सीढ़ी बनाना चाहता था जिससे वह समस्त दानव जाति को बिना कोई पुण्य किए ही स्वर्ग में प्रविष्ट कर सके। माना जाता है, कि रावण के लिए यह कोई मुश्किल काम नहीं था, क्योंकि स्वर्ग के राजा इंद्र को वह पहले ही परास्त कर चुका था।

      यद्यपि वह अपनी इस महत्वकांक्षी योजना को अंजाम तक नहीं पहुँचा पाया था, प्रथम चरण में ही उसे यह कार्य रोकना पड़ गया था। ऐसा कहा जाता है कि यदि वह इस कार्य में सफल हो जाता तो पाप और पुण्य की सारी परिभाषा ही बदल जाती, फिर कोई भी बिना किसी पुण्य कृत्य के ही स्वर्ग में सीधे प्रवेश कर जाता। रावण द्वारा बनाई जा रही स्वर्ग की सीढ़ी में प्रयोग किए गए पत्थर आज भी मौजूद हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह वही पत्थर हैं जिनकी सहायता से रावण ने स्वर्ग में सीढ़ी बनाने का कार्य प्रारंभ किया था।
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रावण ने यहाँ बनाई थी स्वर्ग में जाने की योजना!

      हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से लगभग पचास किलोमीटर की दूरी पर भगवान शिव का एक अति प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसे 'पौड़ीवाला, मंदिर भी कहा जाता है। बताते हैं, रावण द्वारा बनाई गई पत्थरों की वह स्वर्ग की सीढ़ी इसी मंदिर में मौजूद है। रामायण काल के शास्त्रों में वर्णित एक कथा के अनुसार रावण अपनी मर्त्यु के संबंध में सब जानता था परंतु वह अपनी बिरादरी को किसी भी भांति मरने नहीं देना चाहता था। इसके लिए उसने शिव की घोर तपस्या की थी! तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने ही उसे स्वर्ग में सीढ़ी बनाने का आशीर्वाद दिया था।
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      किन्तु भगवान शिव ने एक शर्त भी रखी थी, शर्त के मुताबिक रावण को एक ही रात्रि में पाँच अलग-अलग स्थानों पर सीढ़ी की पाँच-पाँच पौड़ियां बनानी थीं। सीढ़ी की पहली पौड़ियां उसने इसी शिव मंदिर में अर्थात पौड़ीवाला मंदिर में स्थापित कि थीं, दूसरी पौंड़ियां हरिद्वार में, हरि की पौड़ी के रूप में बनाईं थीं, तीसरा स्थान जहां तीसरी सीढ़ी की पौड़ियां विद्यमान हैं वह सुरेश्वर महादेव मंदिर है और चौथा स्थान किन्नर मंदिर बताया जाता है। इन चार स्थानों पर रावण ने पौड़ियां बना ली थीं, शर्त के अनुसार एक अन्य स्थान पर भी पौड़ियां बनानी थीं, परन्तु चार स्थानों पर ही पौड़ियां बनाते-बनाते वह इतना पस्त हो गया था कि उसे नींद आ गयी और सुबह हो गई, इस कारण रावण की स्वर्ग में जाने वाली सीढ़ी बनाने का उद्देश्य अधूरा रह गया। और उसकी मर्त्यु के उपरांत, बचे हुए अन्य असुरों का भी समूल नाश हो गया।


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