जंकफूड नहीं है स्वास्थ के लिए हानिकारक! यह पढ़ने के बाद मजे से खायेंगें जंकफूड!

जंकफूड नहीं है स्वास्थ के लिए हानिकारक! यह पढ़ने के बाद मजे से खायेंगें जंकफूड! 
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      प्रिय मित्रों, इस दुनियां में क्या खाने योग्य है अथवा क्या खाने योग्य नहीं है, इसका प्रमाणित उत्तर न तो आधुनिक विज्ञान ही दे सकता है और न ही मेडिकल साइंस के ज्ञाता ही दे सकते हैं। फिर भी दुनियां में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो बड़ी प्रमाणिकता के साथ यह प्रचारित करने में संलग्न हैं, कि यह खाने योग्य है, और यह खाने योग्य नहीं है। भारत में जिन वस्तुओं को देखने मात्र से ही किसी भी व्यक्ति को उल्टियां आनी निश्चित हैं, उन्हीं वस्तुओं को भारत के बाहर लोग चटखारे लगा-लगाकर बड़े ही चाव से खाते हैं।

     यहां मैं आपसे एक घटना के संबंध में बताना उचित समझूंगा! गर्मियों के दिनों में मैं अपने गांव जा रहा था। मैंने देखा कुछ ग्रामीणों जैसे दिखने वाले लोग खेतों में खड़े पेड़ों के नीचे सूखी लकड़ियां व पत्ते इकठ्ठे कर रहे थे। जिज्ञासावश मैंने गाड़ी रोकी और उन्हें देखने लगा। जब सूखे पत्तों व लकड़ियों के ढेर में उन्होंने आग लगा तब मुझे उनके करीब जाना पड़ा, यह जानने के लिए कि वे इतनी गर्मीं में इस आग से क्या करने वाले हैं। क्योंकि ऐसी कोई खाने वाली फसल, जैसे मूंगफली वगैरह भी नहीं तैयार थी। उनकी लकड़ियों के गठ्ठर के पास कपड़े में कुछ बंधा हुआ रखा था। 
     जब आग तेज हो गई, तब उन्होंने उस कपडे़ की गांठ खोली, उसमें जो निकला उसे देखकर मैं तो सन्न ही रह गया उसमें मरे व घायल बीस से भी अधिक चूहे थे। उन्होंने उन सारे चूहों को भुनने के लिए आग में झोंक दिया और जब वे भुन गए तब वे सारे एक पेंड़ की छांव में बैठकर उन्हें नोच-नोचकर खाने लगे, और हैरानी की बात तो यह थी कि उनमें से एक ने अपने खीसे से एक कांच की सीसी निकाली जिसमें नमक भरा हुआ था। अब यदि यह स्वादिष्ट व्यंजन आपके सामने परोसा जाए, तो आप न उलटी ही कर देंगें बल्कि बिमार भी पड़ सकते हैं।
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     जो लोग यह प्रचारित करते हैं कि जंक-फूड हानिकारक है उन्हें' प्रैक्टिकल लाइफ, का कोई भी अनुभव नहीं है, चाहे वे लोग वैज्ञानिक हों या अवैज्ञानिक, वे सिर्फ कहावतों के आधार पर ही इन बातों में हवा भरते रहते हैं, और लोगों के मस्तिष्क में हीनता की ग्रंथियां पैदा करते रहते हैं। 

      प्रैक्टिकल लाइफ में, जंकफूड खाद्य-पदार्थों के परिणाम, सामान्य खाद्य-पदार्थों की तुलना में अधिक शुभ व सेहतमंद होते हैं। जंकफूड खाने वाले बच्चे, दाल-रोटी खाने वाले बच्चों से ज्यादा स्वस्थ होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जंकफूड का चलन अभी ज्यादा नहीं है वहाँ शुद्ध प्राकृतिक और समान्य भोजन पर ही जीवन जिया जाता है। फिर भी वहां के लोगों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता और न ही वहाँ के बच्चों का ठीक से विकास ही हो पाता है। 
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      प्रायः यह देखा गया है कि खान-पान वही स्वास्थ के लिए अधिक पौष्टिक और लाभप्रद होता है जिसे मन स्वीकृति भाव से ग्रहण करता है। जंकफूड जितने स्वीकार भाव से खाया जाता है, उतने स्वीकार भाव से दाल-रोटी कभी भी नहीं खाई जा सकती है। अगर आप अपने बच्चे की टेबल पर, एक प्लेट में शुद्ध और पौष्टिक तत्वों से भरा हुआ आहार रख दें और दूसरी प्लेट में जंकफूड पदार्थ रख दें और उसे स्वेच्छा से चुनाव करने के लिए स्वतंत्र कर दें तो वह निश्चित ही जंकफूड खाना पसंद करेगा। ऐसे में यदि आप जबरदस्ती उसे वह खाने के लिए बाध्य करेगें जो उसका मन खाने के लिए राजी नहीं है तो वह भोजन उसके लिए किसी विष से कम नहीं होगा। 

     मित्रों, आज के समय में जंकफूड सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला खाद्य-पदार्थ है, लगभग सभी वर्ग के लोग इसे बड़े ही स्वीकार भाव से खाते हैं। और स्वीकृति का भाव ही 'मूल, है। क्या खाने योग्य है, क्या खाने योग्य नहीं है! यह प्रश्न उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना स्वीकृति का भाव महत्वपूर्ण है। स्वीकृति भाव से यदि कोई विष भी पीए तो वह भी अमर्त्य में बदल जाता है। आज की तारीख में जंकफूड भोजन किसी अमर्त से कम नहीं है और ऐसे में यह प्रचारित करना कि जंकफूड हानिकारक है, घातक सिद्ध होने वाला है, इससे सिर्फ हीनभावनांएं ही पैदा होती हैं, जंकफूड के प्रति जो लोगों का लगाव है वह जरा भी कम नहीं होता है। 
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जंकफूड का सेवन कैसे करें :

     दोस्तों, इस जगत में प्रत्येक वस्तु की एक मात्रा निर्धारित है, यहां तक कि हमारी इंद्रियां भी एक मात्रा में ही कार्य करती हैं। अगर यह मात्रा सामान्य से ऊपर या नीचे हो जाए तो जीवन के लिए कठिनाई खड़ी हो जाती है। कोई भी खाद्य-पदार्थ हो उसे उसकी मात्रा का ख्याल रखकर ही सेवन करना चाहिए। सामान्य से अधिक मात्रा में सेवन करने से जीवनदायी औषधियां भी मर्त्यु का कारण बन जाती है। 

कबीर साहब का वचन है! 

अति का भला न बोलना, अति की भली चूप! 
अति का भला न बरसना, अति की भली धूप!! 

     भोजन में, जो आपका मन स्वीकार करे वह यदि उपलब्ध हो तो अवश्य ही उसका सेवन करें! परंतु अति कभी भी न करें, भोजन कोई भी हानिकारक नहीं होता है, सिर्फ 'अति, हानिकारक होती है। इसलिए अति करने से बचें! जंकफूड खाने में इतना मजा आता है कि कब अति होने लगी इसका ठीक-ठीक ख्याल ही नहीं रहता है, अतः जंकफूड खाते समय विशेष सावधानी और सतर्कता बरतें! यदि आप ऐसा करेंगे तो जंकफूड भोजन से आपको कोई हानि नहीं पहुंचने वाली है, यह प्रमाणित तथ्य है। 

जंकफूड का सीमित मात्रा में सेवन, बचाता है कई गंभीर बीमारियों से! 

चाकलेट: चाॅकलेट का उचित मात्रा में सेवन उच्च-रक्तचाप को नियंत्रित करता है। दिमाग को शान्त करता है, क्रोध को ठंडा करता है, रिश्तों को मजबूत करता है! इसका उपयोग रूठे लोगों को मनाने के लिए सबसे ज्यादा किया जाता है। चाॅकलेट ह्रदय से संबंधित रोगों को भी नियंत्रित करने में सहायक है। 
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बियर : अधिकांश बियर का सेवन करने वाले लोगों को ठीक द्रष्टि से नहीं देखा जाता है, खासकर घर के बड़े-बुजुर्ग व महिलाओं का विरोध उन्हें अधिक ही सहना पड़ता है। लेकिन बियर पर हुए शोध बताते हैं कि बीयर में सिल्काॅन की मात्रा बहुत अधिक होती है, सिल्काॅन हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत लाभप्रद मानी जाती है! सीमित मात्रा में नियमित रूप से बियर पीने वाले लोगों की हड्डियों के जोड़, बियर न पीने वालों की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं। बियर का सेवन ह्रदय व किडनी के लिए भी लाभप्रद होता है! यह अल्जाइमर व डेमेंसिया जैसी खतरनाक मानसिक बिमारियों से भी बचाने  में सहायक होती है। 
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     दोस्तों, दुनियाँ में ऐसा कोई भी पदार्थ नहीं है जो सौ फीसदी आपके लिए फायदेमंद हो, सभी में कुछ न कुछ खोट होती ही है। अम्लीय पदार्थ शरीर के लिए बहुत ही नुकसानदेह माने जाते हैं! और अनाजों में सबसे अधिक अम्ल मौजूद रहता है, उनमें दालें सर्वाधिक अम्लीय होती हैं। कुछ दालें तो इतनी अम्लीय होती हैं कि जब भी उनका सेवन किया जाता है, तभी शरीर में गड़बड़ी शुरूं हो जाती है और कई दफे तो समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि यदि समय रहते न ध्यान दिया जाय तो जानलेवा भी हो जाती है। समझने वाली बात यह है कि चाहे बाहर का जंकफूड हो या घर की दाल-रोटी हो, उसका सीमित मात्रा में और विधिपूर्वक ही उपयोग करना चाहिए! प्रैक्टिकल लाइफ में यही उचित माना गया है। 

     

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