BAZAR MEN ASLI KASTOORI KA MILNA. बाजार में असली कस्तूरी का मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

असली कस्तुरी का मिलना किसी चमत्कार से कम है! बाजार में मिलने वाली कस्तूरी अधिकांश होती है नकली!


https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
     यदि आप किसी पंसारी की दुकान पर जांए और उससे कहें कि कस्तूरी दीजिए, तो वह फौरन आपको कस्तूरी दे देता है और उसके एवज में वह आपसे अच्छी-खासी रकम ऐंठ लेता है। लेकिन क्या आपको पता है कि जो कस्तूरी वह दुकानदार आपको मुहैया करा रहा है वह असली है या नकली!

     मित्रों, यह तो आप जानते ही होंगें कि कस्तूरी किसी कारखाने में नहीं निर्मित होती है, वह बनती है एक खास प्रजाति के हिरण की नाभि में, और उसके बनने की प्रक्रिया ठीक वैसी ही है जैसी प्रक्रिया से पुरूषों के भीतर वीर्य बनता है। कहने का तात्पर्य यह है कि यह न आसानी से बनती है और न ही आसानी से उपलब्ध ही हो पाती है। फिर भी अकेले भारतवर्ष में ही प्रतिवर्ष कस्तूरी का व्यापार 'टनों, की मात्रा में होता है, क्या आपने कभी विचार किया है कि यह कस्तूरी कहां से आती है। 


https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
     दोस्तों, इस संसार में ऐसे बहुत से लोग हैं जो आपकी मांगों पर ही निर्भर हैं, जैसे ही आप मांग करते हैं वे तत्क्षण ही उसकी पूर्ति करने में व्यस्त हो जाते हैं। आप बस मांग करें, आप बस झोली फैलाएं, दानियों की इस जगत में कोई कमी नहीं है। कस्तूरी की मांग इतनी ज्यादा है कि पृथ्वी के सारे हिरण भी उसे पूरा नहीं कर सकते, बावजूद इसके दुकानों पर कस्तूरी सदा स्टाॅक में ही रहती है। कस्तूरी की गंध ऐसी है कि प्रत्येक व्यक्ति उसे प्राप्त करना चाहता है, क्योंकि प्रत्येक यहां धनाढ्य होना चाहता है, इसलिए नकली-असली का प्रश्न सदा ही बना रहता है। 

कस्तूरी कैसे बनती है? 

     कस्तूरी एक खास प्रजाति के हिरण की नाभि में बनती है, साधारणत: वह हिरण भी सभी स्थानों पर नहीं पाया जाता है, वह हजारों फीट ऊंचाई वाले स्थानों पर ही रहता है। कस्तूरी सदा 'नर, हिरण के भीतर ही बनती है, यह एक तरह की प्राकृतिक व्यवस्था है, नर हिरण के भीतर जब कस्तूरी परिपक्व हो जाती है, तब उसकी नाभि से महक आने लगती है। जब यह महक आती है तभी हिरणी आकर उससे विषय-भोग करती है, और गर्भधारण करती है। विषय-भोग करने से पूर्व यदि कोई उसकी हत्या आदि करके कस्तूरी प्राप्त कर लेता है तो उसका अनिष्ट निश्चित ही होता है।  


https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
     अतः विषय-भोग करने के उपरांत ही इस कस्तूरी को प्राप्त करना उचित माना जाता है। सामान्यतः एक व्यस्क हिरण के भीतर औसत एक से डेढ़ इंच तक ही कस्तूरी पायी जाती है। कस्तूरी इस प्रजाति के हिरण के बच्चों में भी बनती है परन्तु वह उपयोगी नहीं होती है। 

     कस्तूरी जैसी ही गांठ व थैली कुछ अन्य पशुओं में भी पायी जाती है जो बिल्कुल कस्तूरी से ही मिलती-जुलती होती है। जैसे एक जंगली बैल होता है, जिसे ओबिबस मस्केटस कहते हैं, यह जहां रहता है उसके सौ मीटर की दूरी तक इसके शरीर से कस्तूरी जैसी गंध आती है। अनास मस्कटा नाम कि एक बत्तख भी होती है इसके भीतर भी कस्तूरी की तरह गंध आती है। इसी तरह एक बकरों की प्रजाति भी होती है और कुछ मगरमच्छों की प्रजातियां भी होती हैं जिनके मांस व रक्त से कस्तूरी जैसी गंध आती है। 

https://www.paltuji.com
https://www.paltuji.com 
     नकली कस्तूरी का निर्माण इन जानवरों के रक्त व मांस की सहायता से बड़ी आसानी से बहुत बड़ी मात्रा में किया जा सकता है। ऐसे पदार्थ भी होते हैं जिनकी महंक बिल्कुल कस्तूरी जैसी ही होती है। 

ऐसे करें कस्तूरी की पहचान! 

     पहला प्रयोग: असली कस्तूरी की पहचान करने के लिए विभिन्न प्रयोग किए जाते हैं। एक गिलास में स्वच्छ जल भरकर उसमें कस्तूरी का दाना डालें, यदि वह गिलास की तलहटी में जाकर बैठ जाए और गले नहीं तो समझना कस्तूरी असली है! 

     दूसरा प्रयोग: एक तसले या अंगीठी में कोयले की आग जलाएं, जब कोयले लाल हो जाएं तब कस्तूरी का दाना उस आग में डाल दें, यदि नकली दाना होगा तो वह जलकर राख हो जाएगा अन्यथा यह चिट-चिट की आवाज करता हुआ पिघलेगा और बुलबुले छोड़ेगा, जब ऐसा हो तब आप समझ लेना कि यह असली है। 

     कस्तूरी कपडे़ में बांधकर रखने से वह पीलापन छोड़ती है। कस्तूरी हांथ में लेने पर वजनी मालुम पड़ती है और छूने में मुलायम व चिकनी होती है। प्रायः कस्तूरी के दाने का आकार एक जैसा नहीं होता है, किसी-किसी कस्तूरी में यह मटर के आकार का पाया जाता है और किसी-किसी में यह इलायची के दाने के आकार में उपलब्ध होता है। कस्तूरी का प्रयोग अनेक शुभाशुभ विधियों में किया जाता है, इसका सर्वाधिक प्रयोग मंत्र आदि लिखने में ही किया जाता है। 

https://www.paltuji.com



     


Previous
Next Post »