After death even today souls come here. मर्त्यु के बाद आज भी यहाँ आती हैं आत्माएँ!

मर्त्यु के बाद आज भी यहाँ आती हैं आत्माएँ, अपना संदेश देने! 
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      आत्मा जब-तक पूर्णत: मुक्त नहीं हो जाती, तब-तक वह नए शरीरों को धारण ही करती रहती है, प्राचीनकाल से ही लोगों की यह मान्यता रही है। वर्तमान समय में भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो आवागमन के इस चक्र पर विश्वास रखते हैं। रोम में इस धारणा को बड़ी ही दृढ़तापूर्वक स्वीकार किया जाता है। पोप निकोलस व पोप बेनेडिक्ट भी इस धारणा के पक्षधर थे, उन्हें भी यह विश्वास था कि आत्माएँ मरणोपरांत इस जगत में लौटती हैं और अपनी वापसी के प्रमाण व सदेंश इस पृथ्वी पर मौजूद शरीरी लोगों को तक पहुंचाती हैं। 

      आत्माओं द्वारा छोड़े गए उनकी वापसी के प्रमाणों व संदेशों के लिए उन्होंने रोम में एक संग्रहालय भी बनवाया था, जिसे (हाउस आॅफ शैडोज़) प्रेतों का घर कहा जाता है। इस घर में उन्होंने ब्लैक बोर्ड, मिट्टी, राख, कांच, पेंटिंगें और लकड़ी के तख्त जैसी तमाम वस्तुएं रखवाईं थीं। संग्रहालय से जुड़े लोगों का कहना था कि आत्माएँ मरने के बाद इस संग्रहालय में आती हैं और अपने अशरीरी अनुभवों को इन वस्तुओं पर अंकित कर जाती हैं। उनके द्वारा अंकित अनेकों चिंन्ह इस संग्रहालय में आज भी मौजूद हैं।
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इस संग्रहालय तक जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है!

      रोम में, टाईबर नदी के किनारे एक चर्च है उसी चर्च के एक भाग में यह संग्रहालय बना हुआ है, परन्तु इस संग्रहालय में प्रवेश करने के लिए कोई सार्वजनिक मार्ग नहीं है। संग्रहालय देखने की इच्छा रखने वाले लोगों को सबसे पहले संग्रहालय के प्रबंधक से स्वीकृति लेनी पड़ती है, स्वीकृति मिलने के उपरांत प्रबंधक की तरफ से एक 'गाइड, भेजा जाता है जो अंधेरी व संकरी गलियों से होता हुआ लोगों को इस अनोखे संग्रहालय में लेकर जाता है। 

      संग्रहालय में एक प्राचीन लकड़ी के तख्त का टुकड़ा भी रखा हुआ है जिस पर किसी की उंगलियों के निशान छपे हैं, इसे संग्रहालय की सबसे बहुमूल्य वस्तु भी माना जाता है। संग्रहालय देखने आए लोगों से बातचीत करते समय गाइड ने बताया कि यह निशान दिवंगत पादरी 'फादर पेजिनी, का है, फादर पेजिनी मरने के बाद अक्सर इस  संग्रहालय में आया करते थे उन्होंने चर्च की एक (नन) भिक्षुणीं को दर्शन भी दिए थे। अनेक चिंन्ह व भेंटें वे उस नन्स को दे गये थे।
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     19वीं शताब्दी के आरंभ में एक अन्य फादर जुएट द्वारा इस संग्रहालय की साफ-सफाई करायी गयी थी और दूर-दराज की यात्राएं करके अनेक महत्वपूर्ण वस्तुओं को इस संग्रहालय में संग्रहित करके रखा गया था। कहते हैं, 1920 तक यह संग्रहालय आम लोगों के लिए खुला रहा, परन्तु फादर जुएट की मर्त्यु के बाद इसकी देखरेख का जिम्मा फादर गिल्ला के कंधों पर चला गया। उन्होंने संग्रहालय के पुनर्गठन और उसमें रखी अप्रमाणित वस्तुओं को नष्ट करने की इच्छा से उसे तीस वर्षों के लिए बन्द करवा दिया। तीस वर्ष बीतने के बाद जब 1950, में उसे पुन: खोला गया तो उसमें रखी तमाम प्रमाणित वस्तुएं भी नष्ट हो चुकी थीं। 

     इधर पिछले बीस-तीस वर्षों से संग्रहालय में फिर से लोगों की उत्सुकता बढ़ी है। एक बार फिर से प्रमाणों, चिंन्हों व वस्तुओं को एकत्रित करके इस संग्रहालय में सजाया जा रहा है। क्योंकि रोम के अलावा रूस और अमेरिका जैसे नास्तिक देश भी अब आत्मा, परमात्मा, भूत-प्रेत और पुनर्जन्म जैसे सिद्धांतों पर विश्वास करने लगे हैं, और बड़ी गंभीरता से इन विषयों पर अध्ययन भी कर रहे हैं। 


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