उसकी लाश कब्र से बाहर पड़ी मिली थी, हकीकत जानकर लोग रह गए थे दंग, मरने के बाद भी किया था हजारों लोगों ने बलात्कार।

उसकी लाश कब्र से बाहर पड़ी मिली थी, हकीकत जानकर लोग रह गए थे दंग, मरने के बाद भी किया था हजारों लोगों ने बलात्कार।


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          वह थी ही इतनी खूबसूरती की बला कि जो भी पुरूष उसे देखता वह उसके जिस्म को मसलने के लिए तड़फड़ाने लगता। लेकिन वह जितनी खूबसूरती में लाजवाब थी उतनी ही दिमाग से खतरनाक भी थी। वह जानती थी कब किसके साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए, शायद इसीलिए वह कामयाब भी थी। कहतें हैं! मिश्र में उसकी हैसियत का अन्य कोई शाशक हुआ ही नहीं। वह अय्याशी में भी नंबर वन थी।


          कुछ प्राचीन लेखकों का मानना है कि वह कई-कई रातों तक पुरूषों के साथ रंगरलिंयां मनाती रहती थी, कमसिन लड़कियों का नंगा नाच करवाती और अश्लीलता का सरेआम समर्थन करती थी। शाही घराने में  शायद ही ऐसा कोई पुरुष बचा होगा जिसके साथ उसने शारीरिक संबंध न बनाए हों। युनान की जनता के बीच वह 'मेरी योशेन, के नाम से प्रसिद्ध थी। इस नाम का तात्पर्य ऐसी स्त्री से है जिसने अनगिनत पुरूषों के साथ काम संबंध बनाएं हों। इस तरह की स्त्रियों को अंग्रेजी में 'निंफोमिनायक, बिमारी से पीड़ित माना जाता है।

          विश्व के मदमस्त यौवन की सरताज 'क्लियोपैट्रा, का जन्म ईसा से करीब 70वर्ष पूर्व युनान में हुआ था। उसके पिता टालभी के वंशज बताए जाते हैं, टालभी सिकंदर महान का सेनापति था।क्लियोपैट्रा अपने समय में  विश्व की सर्वाधिक सुंदर और बदचलन हसीना थी। उसके जीवन पर तमाम सच्ची-झूठीं कहानियां गढ़ी जा चुकी हैं, तमाम उपन्यास और तमाम फिल्में भी बन चुकी हैं। उसको जानने वालों का दावा है कि उसके सौंदर्य का मुकाबला करने वाली कोई दूसरी औरत इस जमीन कभी उतरी ही नहीं। क्लियोपैट्रा अपनी अय्याशियों की मजबूरी में महज बारह वर्ष की आयु में ही अपना कौमार्य खो चुकी थी।

         अट्ठारह वर्ष की आयु में टालभी वंश के राजकुमार टालभी द्वितीय से मिश्र के रीति-रिवाजों के अनुसार क्लियोपैट्रा का विवाह संपन्न करा दिया गया। लेकिन दोनों के विचार और स्वभाव भिन्न-भिन्न होने के कारण उनके बीच कोई खास भावनात्मक संबंध नहीं बन पाया। यही मुख्य कारण था कि दोनों पति-पत्नी होने के बावजूद भी एक-दूसरे से अलग-अलग रहने लगे। उसके विवाह को अभी चार वर्ष ही बीते थे कि एक जानलेवा बीमारी के कारण टालभी द्वितीय की मर्त्यु हो गई।

         क्लियोपैट्रा के यौवन का तूफान इतना भयंकर था कि टालभी द्वितीय की मर्त्यु के पश्चात राजा टालभी-14, भी स्वयं को इस तुफान से नहीं बचा पाया और झपट्टा मारकर उसने क्लियोपैट्रा से विवाह रचा लिया लेकिन यह विवाह भी पूरी तरह सफल नहीं कहा जा सकता। क्योंकि क्लियोपैट्रा अब मनमानी पर उतारू हो चुकी थी। टालभी सिर्फ उसके सामने नाम मात्र का ही पति रह गया था, सारा राज-काज क्लियोपैट्रा ही संभालने लगी थी। सत्ता की बागडोर हांथ में आते ही क्लियोपैट्रा निरंकुश हो गई थी। वह खुलेआम अय्याशी करने लगी, महल में नग्न नृत्यों का आयोजन करवाने लगी और खुद भी उन आयोजनों में सम्मिलित होने लगी, उसकी निगाह में कामभोग से बड़ा सुख और दूसरा नहीं था।


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        उसके महल में ऐसा कोई भी दरबारी नहीं था जिसे क्लियोपैट्रा के जिस्म से खेलने का सौभाग्य न मिला हो। मिश्र की जनता इस तरह अपने देश की सभ्यता व संस्कृति का पतन होता नहीं देखना चाहती थी और वह यह भी नहीं चाहती थी कि उसका महाराज नपुंसकों की भांति बैठा रहे और एक औरत मिश्र को तहस-नहस करती रहे। उन्होंने क्लियोपैट्रा की हुकूमत के खिलाफ आवाजें बुलंद करनी शुरूं कर दीं, जल्दी ही यह विरोध ग्रह-युद्ध में बदल गया। यह विरोध इतना उग्र था कि क्लियोपैट्रा व उसके सैनिकों को भी यह भारी पड़ गया। अपनी जान बचाने के लिए रातो-रात क्लियोपैट्रा को मिश्र से भागकर रोम के लिए कूच करना पड़ा। उसके विरोधी और विद्रोही पागलों की भांति उसे जगह-जगह ढूंढ़ने लगे। किसी को नहीं पता था कि क्लियोपैट्रा कहां गई, विद्रोहियों ने उसके सभी वफादारों व आशिकों को चुन-चुनकर मौत के घाट उतार दिया।

          उस समय रोम का सम्राट जूलियस सीजर था। रोम के इतिहास में जूलियस सीज़र का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। महान नाटककार शेक्सपियर द्वारा जूलियस सीज़र के जीवन पर एक विस्तृत महाकाव्य की रचना भी की गयी है, उस महाकाव्य का नाम उसने जूलियस सीज़र ही रखा है। जूलियस सीज़र नामक महाकाव्य में मुख्य किरदार क्लियोपैट्रा को ही बनाया गया है।

          सबसे पहले रोम पहुंचकर उसने जूलियस सीज़र की कुंडली खंगाली, पता चला जूलियस सीज़र भी शबाब व कबाब का दीवाना है। जूलियस के दरबार में पहुंचने के लिए उसने एक अनोखी योजना बनाई, एक आलीशान कालीन में लिपटकर लुढ़कते हुए वह सीजर के सिंहासन तक पहुंची। जूलियस सीज़र भी आश्चर्यचकित हुआ उसने सैनिकों को कालीन खोलने का आदेश दिया। जैसे ही कालीन खुला, जूलियस की आंखें खुली की खुली रह गईं, ऐसी हंसीन यौवन से लबरेज, कामुकता की देवी उसने अपने जीवन काल में भी न देखी थी। काफी देर तक वह उसकी कामुक देह को टकटकी लगाए देखता रहा।

          क्लियोपैट्रा ने उसे बड़ी शालीनता, नरमी व समर्पण भाव से नमस्कार किया और अपना परिचय बताया। मेरा नाम क्लियोपैट्रा है। मैं मिश्र की महारानी हूँ और अब आपकी शरण में आई हूँ, मेरा निवेदन स्वीकार कीजिए। उस समय जूलियस सीज़र की आयु पचास वर्ष से भी अधिक थी जबकि क्लियोपैट्रा अभी तीस वर्ष की ही रही होगी। जूलियस सीज़र उसकी जवानी और खूबसूरती का गुलाम हो गया उसने उसे अभयदान देकर अपने शाही महल में मेहमान बना लिया।
         बिना देर किए उसने क्लियोपैट्रा से विवाह कर लिया और यह वचन भी दे दिया कि उससे पैदा संतान राजगद्दी की वारिस बनेगी। जूलियस सीज़र बूढ़ा तो था ही और क्लियोपैट्रा के जिस्म पर आसक्त भी बहुत अधिक था। इसी का फायदा उठाकर उसने मिश्र की तरह ही रोम के शासन की चाबी भी अपने हांथ में ले ली। उसकी मनमानी में जूलियस सीज़र ने कभी भी हस्तक्षेप नहीं किया। रोम की जनता भी क्लियोपैट्रा के सौंदर्य की दीवानी थी रोम में उसे सौंदर्य व प्रेम की देवी 'वीनस, की उपाधि से नवाजा गया। कई मंदिरों में तो वीनस देवी की मूर्तियां हटाकर वहाँ क्लियोपैट्रा की शानदार मूर्तियां लगाई गईं, रोमवासी क्लियोपैट्रा को ही प्रेम की देवी मानने लगे थे।


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           कुछ समय पश्चात उसने एक पुत्र जन्म दिया। उसका नाम 'सिजेरियन, रखा गया वह भी क्लियोपैट्रा की तरह ही सुन्दर व हष्ट-पुष्ट था। सम्राट जूलियस सीज़र की मर्त्यु के बाद जब रोम के शासन की कमान संभालने का वक्त आया तब सिजेरियन के राजगद्दी पर बैठने को लेकर रोम की जनता दो गुटों में बंट गयी। एक तरफ के लोग चाहते थे कि राजगद्दी पर वही बैठे जिसकी रगों में माता पिता दोनों का ही खून रोमन हो। जबकि सिजेरियन की मां क्लियोपैट्रा रोमन नहीं थी वह मिश्र से आई थी।

           लेकिन क्लियोपैट्रा अब इतनी शक्तिशाली हो चुकी थी कि तमाम विरोधों के बावजूद भी उसने महल के दरबारियों व सेनापतियों को विश्वास में लेकर सिजेरियन को गद्दी पर पर बैठा दिया और रोम की जनता कुछ भी न कर सकी। लेकिन क्लियोपैट्रा का भाग्य इतना अच्छा नहीं था सिजेरियन के नशीब में ज्यादा दिन राज गद्दी पर बैठना नहीं लिखा था जल्दी ही मर्त्यु ने उसे गले लगा लिया।

          बेटे की मौत के बाद बड़ी समझदारी से वह रोम से पलायन कर गयी। क्योंकि वह जानती थी कि अब जो भी राज गद्दी पर बैठेगा वह राज वंश का ही खून होगा और वह उसे कतई सहन नहीं करेगा। कोई मर्द उसके ऊपर शासन करे क्लियोपैट्रा को यह जरा भी पसंद नहीं था। इससे पहले कि उसका शोषण हो, उसके विरोधी षडयंत्र रचें उसने स्वयं ही रोम को अलविदा कह दिया। बेशकीमत हीरे-जवाहरात लेकर वह पुनः मिश्र की धरती पर आ पहुंची, उस समय वहां सत्ता के लिए भयंकर खूनी संघर्ष चल रहा था। इस संघर्ष में मार्क एंटोनी नाम का शख्स सबसे आगे चल रहा था उसकी जीत लगभग तय थी। वह भी स्वभाव से अश्लीलता का बहुत अधिक पोषक था। क्लियोपैट्रा को और क्या चाहिए था भला, उसके हांथ तो जैसे बटेर ही लग गई। उसने मार्क एंटोनी को एक प्यार भरा पैगाम भिजवाया उस पैगाम में उसने लिखवाया कि यदि वह उसे मिश्र में रहने की अनुमति दिलवायेगा तो वह तन और धन से एंटोनी की सहायता करेगी।

         मार्क एंटोनी बहुत बुद्धिमान और शातिर किस्म का इंसान था क्लियोपैट्रा क्या आफत है वह उसे भलीभांति मालुम था। वह उस आफत को गले लगाकर सत्ता की चाबी हथियाने का ख्वाब देखने लगा, इस समय उसे धन की बहुत जरूरत थी। रोम से लाया हुआ हीरे-जवाहरातों का खजाना उसने मार्क एंटोनी को सौंप दिया। भाग्य ने एंटोनी का साथ दिया और वह मिश्र का शासक बना और उसने क्लियोपैट्रा को अपनी रानी बना लिया।

         एक साल बाद क्लियोपैट्रा ने एंटोनी के जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। परंतु एंटोनी ज्यादा दिनों तक उसके साथ न रह सका उसकी पहली पत्नी का बेटा 'आगस्तय, ही उसका दुश्मन बन बैठा। इस कारण एंटोनी ने आगस्तय व उसकी मां दोनों को ही त्याग दिया। आगस्तय और एंटोनी के बीच वर्षों तक युद्ध चलता रहा। अंत में मार्क एंटोनी बुरी तरह हार गया। तभी उसे किसी ने झूंठी खबर दी कि उसकी प्राणों से प्यारी क्लियोपैट्रा ने आत्महत्या कर ली है। यह सुनकर एंटोनी बौखला गया और उसने खुद को गोली मारकर अपने इस जीवन लीला का दी-एंड कर लिया।


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         क्लियोपैट्रा को आगस्तय के सैनिकों ने घेर रखा था, वह अपने शाही महल में कैद थी। आगस्तय ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि क्लियोपैट्रा को नग्न करके उसे मिश्र की सड़कों पर घुमाया जाय। क्लियोपैट्रा अपने खूबसूरत जिस्म को हमेशा बेशकीमती हीरे-जवाहरातों से ढके रहती थी। जानकार बताते हैं कि उसने उन हीरे-जवाहरातों में जहरीले पालतू सांप छुपा रखे थे। जब उसे मालुम पड़ा कि उसे निर्वस्त्र करके सड़कों पर घुमाए जाने की योजना बन रही है तो उसने अपने कोमल शरीर को सांपों से डसवा लिया और मर्त्यु को प्राप्त हो गयी। कहते हैं कि उसकी खूबसूरती और आकर्षक का प्रभाव इतना अधिक था कि मर्त्यु के पश्चात उसकी लाश कब्र से बाहर पड़ी मिली थी। जब उसकी जांच-पड़ताल की गयी तो पता चला मरने के बाद भी उसके साथ हजारों की संख्या में लोगों ने बलात्कार किया था।

          क्लियोपैट्रा आज भी लोगों के दिलों में अमर है। उसके जीवन पर तमाम कविताएँ और किताबें लिखी जा चुकी हैं और कई फिल्में भी बन चुकी हैं। वह चाहे जैसी भी थी लेकिन वह सौंदर्य का प्रतीक मानी जाती है।


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