शायद आपके ख्याल में नहीं होगा कि फिल्में सदा 'शुक्रवार, के दिन ही क्यों रिलीज की जातीं हैं,

              

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           रात के आकाश में दिखने वाला सबसे चमकीला ग्रह 'शुक्र, है। शुक्र को बारह राशियों में तुला एवं बृषभ राशियों का स्वामी माना गया है। जातक की कुंडली में यह दूसरे स्थान का प्रतिनिधित्व करता है। शुक्र प्रेम का भी प्रतीक है, रोमन किवदंतियों में शुक्र को वीनस की देवी कहा गया है और वहाँ वीनसदेवी के मंदिर भी मौजूद हैं युवक-युवतियां अपने प्रेम की सफलता के लिए वीनस देवी के मंदिर में जाकर प्रार्थना करते हैं।

         शुक्र ग्रह का मुख्य रत्न 'हीरा, है। हीरा सदा ही लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता रहा है, विश्व भर में हीरे को प्राप्त करने के लिए जितना लोग विक्षिप्त रहतें हैं उतना अन्य किसी भी पत्थर के लिए नहीं रहते। महिलाओं को हीरा बेहद पसंद है। सगाई की रस्म में 'वरपक्ष, द्वारा होने वाली 'वधू, को हीरे की अंगूठी पहनाकर उसे स्वीकार करने की प्रकिया को प्रारंभ किया जाता है।

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शुक्र ग्रह की प्राकृति:


         प्रायः सभी की जन्मकुंडली में शुक्र का प्रभाव अन्य ग्रहों की तुलना में कुछ अधिक ही रहता है और सभी मनुष्य इस ग्रह से परिचित भी हैं, सभी को यह आसानी से दिखाई भी पड़ जाता है, पृथ्वी पर जीवन को पनपाने में शुक्र की बहुत बड़ी भूमिका है। शुक्र के प्रभाव में जन्में बालक यदि पुरूष हुए तो बलिष्ठ व आकर्षक होते हैं और स्त्रियाँ हुईं तो वे बड़ी मनमोहक व चंचल स्वभाव की होती हैं, नयन-नक्श दोनों के ही सुन्दर होते हैं। शुक्र वीर्य, विलासिता कामुकता एवं मनोरंजन जगत का स्वामी भी है और यह असुरों का गुरु है।
         जिस युवक की कुंडली में शुक्र पीड़ित होता है अथवा ठीक स्थिति में नहीं होता है वह युवक अपने अनमोल जीवन का एक बड़ा भाग स्त्रियों के इर्दगिर्द मड़राने में ही गवां देता है। ऐसा व्यक्ति यदि मित्रता भी करता है तो उन्हीं व्यक्तियों से या उन्हीं परिवारों से मित्रता करता है जिसके घर में स्त्रियों व बहन-बेटियों की संख्या अधिक होती है। लेकिन वह सफल नहीं होता, ऐसे व्यक्ति के भीतर प्रेम भावनाएं बहुत प्रगाढ़ होती हैं, वह स्त्रियों का प्रेम पाने के लिए सदा ललाईत रहता है परन्तु उसे जीवन प्रेम की रिक्तता में ही व्यतीत करना पड़ता है।


        किसी व्यक्ति की कुंडली में 'राजयोग, ही क्यों न हो, परन्तु यदि शुक्र पीड़ित है तो उसका प्रभाव अवश्य ही होगा, यह ग्रह किसी को भी क्षमा नहीं करता कभी-कभी इसके दंड का प्रभाव ऐसा भी होता है कि इससे प्रभावित हुआ व्यक्ति आनंदित होता है जैसे कुछ तथाकथित साधू-महंत हैं उनके बड़े-बड़े आश्रम हैं, मान-सम्मान है, नानाप्रकार की भोगवस्तुएं हैं परन्तु वे सभी साधू-महंत भोग और विलासिता में ही लिप्त पाये जाते हैं। फिर भी इस विलासिता के जीवन को वे त्यागना नहीं चाहते, इस विलासिता से वे आनंदित मालुम पड़ते हैं। 

कला व मनोरंजन जगत शुक्र ग्रह के अधीन है।


          अभिनय व एक्टिंग करना सभी को बहुत पसंद है वर्तमान में सर्वाधिक लोग अभिनय के क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए संघर्षरत हैं। लेकिन सफलता उन्हीं लोगों को मिलती हुई दिखाई पड़ती है जिनके जीवन में शुक्र का सहयोग अधिक रहा है। जिन व्यक्तियों को यह सहयोग नहीं मिल रहा है, अथवा कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति शुभ फलदायी नहीं है उन व्यक्तियों को सफलता के स्थान पर हानि होने की संभावना ही अधिक रहती है। ऐसे व्यक्तियों द्वारा निर्मित धारावाहिक एवं फिल्में दर्शकों द्वारा नकार दिए जाते हैं और वह सब सामग्री फ्लॉप सिद्ध हो जाती है।

इसलिए शायद आपके ख्याल में नहीं होगा कि फिल्में सदा 'शुक्रवार, के दिन ही क्यों रिलीज की जातीं हैं अन्य दिनों में क्यों नहीं रिलीज करते हैं।
          फिल्में शुक्रवार के दिन ही रिलीज करने का निर्णय भी शुक्र ग्रह को ख्याल में रखकर ही लिया गया है इसके पीछे का कारण भी यही है कि यह करोबार पूरी तरह शुक्र के सुपुर्द है। आदमी के ही कार्य बंटे नहीं हैं, ग्रहों के भी कार्य बंटे हैं, स्थान बंटे हैं, क्षेत्र बंटे हैं। आदमी ही अकेला राजनैतिज्ञ नहीं है यह राजनीति ग्रह भी जानते हैं और ग्रह जानते हैं शायद इसीलिए आदमी भी कर पाता है अन्यथा आदमी के पास प्रेरणा कहां से आयेगी। आदमी जो कुछ भी सीखता है, जो कुछ भी जानता है वह सीख, वह जानकारी वह आस्तिव से ही प्राप्त करता है।

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शुक्रग्रह के कुप्रभाव से बचने के लिए क्या करना चाहिए।


          ज्योतिषशास्त्रों में शुक्र ग्रह के कुप्रभावों से बचने के लिए अनेकों प्रकार के उपाय बताए गए हैं, इतने उपाय हैं कि संपूर्ण जीवन भी कम पड़ जाय। लेकिन उन कुप्रभावों की शांति होती दिखाई नहीं मालुम पड़ती और दिन-प्रतिदिन शुक्र का कुप्रभाव बढ़ता जा रहा है, भारत की कुंडली में शुक्र की स्थिति ठीक नहीं मालुम पड़ती। शुक्र के कुप्रभावों से बचने के लिए संकल्प की साधना करें, मंगल की शुभता को बढ़ाने का प्रयास करें, ध्यान करें, बुद्ध को मजबूत करें, बुद्धि को तीक्ष्ण करें, जगत की नश्वरता को पहचानें, सौंदर्य की क्षणभंगुरता के प्रति जागरूक रहें, जानें यही महामंत्र है, यही महाउपाय है इसे करें, इसे क्षण भर के लिए भी न बिसरने दें, यह स्वंमरण बना रहे तो सब सदा के लिए ठीक हो जाता है।



         

       

   


       

          
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