The possibilities of gender-change are high. जानिए! उन लड़के व लड़कियों के बारे में जिनके भीतर सफल लिंग-परिवर्तन की संभावनाएँ अधिक होती हैं।

https://www.paltuji.com/
practical life
जानिए! उन लड़के व लड़कियों के बारे में जिनके भीतर सफल लिंग-परिवर्तन की संभावनाएँ अधिक होती हैं।

      यह प्रकिया जब-तक विकसित नहीं थी तब-तक यही समझा जाता था कि स्त्री होने या पुरुष होने की कुंजी सिर्फ प्राकृति और परमात्मा के ही हांथ में है। वह जिसे चाहे, जब तक चाहे स्त्री अथवा पुरुष बनाये रख सकता है। और इसे मनुष्य के कर्मों का फल भी समझा जाता था, अभी भी कुछ मूढ़-विद्वान यही समझते हैं कि जो स्त्री है वह सदा स्त्री की ही योनि में जन्मती है और पुरुष को सदा पुरुष की योनि ही प्राप्त होती है, उनकी समझ का अर्थ है कि सिर्फ शरीर बदलता है, लिंग परिवर्तन जैसी कोई घटना नहीं होती।

      अगर इस बात में जरा भी सच्चाई होती तो परमात्मा की सारी व्याख्या ही बदल जाती, फिर तो उपनिषद और गीता व्यर्थ हो जाते, फिर तो आत्म और सत्य एक ही है यह कहने का अर्थ ही खो जाता, फिर तो महावीर की कैवल्य दशा भी झूंठी हो जाती। क्योंकि परमात्मा को, सत्य को जिन्होंने भी जाना है उनका सभी का अनुभव यही है कि वह एक है, और वह परमात्मा परम स्वतंत्रता है, वह बंधन मुक्त है और जिसका स्वभाव ही स्वतंत्रता है, जो स्यमं ही सभी बंधनों से मुक्त है, जिसने परतंत्रा को कभी जाना ही नहीं वह भला मनुष्य को क्योंकर परतंत्र रखेगा।

      नहीं! मनुष्य स्वतंत्र है, परमात्मा की भांति ही मनुष्य के पास भी परम स्वतंत्रता की कुंजी है। विवेकानन्द कहते थे कि मनुष्य इतना स्वतंत्र है कि वह चाहे तो अपने शरीर का गठन स्यमं ही कर सकता है। आपका स्वास्थ्य, आपकी आयु सब आपके ही हांथ में है, आप जब चाहे इसे, जैसे चाहे इसे समाप्त कर सकते हैं, परमात्मा की तरफ से कोई बंधन नहीं है, वह आज तक किसी से कहने नहीं आया कि आप ऐसा नहीं कर सकते, यह मेरे नियमों के विरूद्ध है।

      इसलिए यदि कोई लड़की, लड़का बन जाती है या कोई लड़का लड़की बन जाता है तो इसमें न कोई आश्चर्य है न ही कोई परमात्मा की तरफ से बाधा है। अगर कोई बाधाएं हैं भी तो जो लोग लिंग परिवर्तन के लिए इच्छुक हैं उनके अपने चित्त की तरफ से ही हैं।

वे चित्त की बाधाएं क्या हैं? अब हम यह समझेंगें!

      पहले तो यह समझ लें कि इस जगत में कुछ भी पूर्ण नहीं है, सब आधा और अधूरा है। और इस अधूरेपन की वजह से ही यह जीवन गतिशील है। जिस दिन यह अधूरपन मिट जायेगा उसी दिन यहां सब शून्य हो जायेगा फिर कुछ भी शेष नहीं रह जाएगा। दुनियां में ऐसा कोई भी पुरूष नहीं है जो कि संपूर्ण है, और न ही कोई ऐसी स्त्री है जो पूरी स्त्री है। इसे अगर और सरल भाषा में समझें तो कह सकते हैं कि दुनियां का कोई भी लड़का शुद्ध (Pure) लड़का नहीं है, उसमें थोड़ी-बहुत मात्रा  लड़की की भी (mix) रहती है, घुली-मिली रहती है। इसी प्रकार कोई लड़की भी शुद्ध लड़की नहीं है, उसके भीतर भी कुछ न कुछ हिस्सा लड़के का अवश्य ही मौजूद होता है।
      जैसे कुछ लड़कियां ऐसी होती हैं, जिनका स्वभाव व बर्ताव बिल्कुल लड़कों जैसा होता है। उनका चलने का ढंग, उनके बोलने का ढंग, उनके पहनावे का ढंग सब कुछ मर्दों जैसा मर्दाना होता है। उनके भीतर लड़के की मात्रा बहुत अधिक होती है, ऐसी लड़कियां सिर्फ कहने के लिए ही लड़की होती हैं, उनकी सिर्फ देह की बनावट ही स्त्री की होती है, भीतर उनके स्त्री का अंश बिल्कुल ही न्यून होता है, भीतर से वे पुरूष ही होती हैं। ऐसी लड़कियों को विवाह के बाद घर में गृहणीं (House wife) बनकर जीना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता, वह भीतर का पुरूष धक्के मारता रहता है। और शायद यह आपको मालुम नहीं है कि इस मामले में लड़कियां भी दो तरह की इच्छाएं रखने वाली होती हैं। एक वे जो अपने जीवन के लिए एक लड़के की तलाश में रहती हैं और दूसरी वे जो खुद ही एक लड़का बनकर जीना चाहतीं हैं।


https://www.paltuji.com/
practical life
      यह जो दूसरे प्रकार की लड़कियां हैं जो खुद ही लड़का बनकर जीना चाहती हैं, जिनका रोम-रोम भीतर से लड़का ही है, जिन्हें लड़की होना स्यमं ही बोझ लगता है, ख्याल रहे, हम आमतौर से यही समझते आए हैं कि सिर्फ मां-बाप के लिए ही लड़की बोझ होती है, लेकिन लड़की सिर्फ मां-बाप के लिए ही बोझ नहीं होती, वह कभी-कभी अपने चित्त की वजह से अपने लिए भी बोझ बन जाती है। फिर उसे अपना ही शरीर काटने लगता है, वह न प्रेम कर पाती है न ही समर्पण कर पाती है, उसकी मनोदशा अति-दयनीय हो जाती है। इस मनोदशा से बाहर निकलने के लिए लिंग-परिवर्तन एक कारगर और बेहतर विकल्प है। लेकिन यह सभी के लिए नहीं है, क्योंकि इसका खर्च बहुत ही ज्यादा है।


      इसी तरह की लड़कियों पर यह लिंग परिवर्तन की प्रक्रिया ठीक ढंग से सफल हो पाती है। और ऐसी लड़कियों को ज्यादा कठिनाई भी नहीं होगी क्योंकि वे भीतर से तो लड़का ही होती हैं सिर्फ बाहर के शरीर की जो बनावट है उसे ही बदलना पड़ता है, और इस परिवर्तन के लिए उनका शरीर बहुत शीघ्रता से राजी हो जाता है।

अब हम चर्चा करेंगे उन लड़कों की जिनके ऊपर यह प्रक्रिया आसानी से सफल हो जाती है।

     जैसे अभी आपने जाना कि कुछ लड़कियां स्वभाविक ही लड़कों जैसे स्वभाव की होती हैं, ठीक ऐसे ही कुछ लड़कों का स्वभाव भी लड़कियों की तरह ही होता है। उन्हें आप जनाना (Feminine) भी कह सकते हैं। यह सत्य है कि भिन्नता ही आकर्षण का केंद्र है, (Variation is the center of attraction) लड़के का लड़की के प्रति आकर्षित होना स्वभाविक है और उसे आकर्षित करने के लिए अपनी जीवनशैली को बदलना भी स्वाभाविक है। लेकिन लड़के द्वारा स्यमं ही लड़की जैसा प्रदर्शन करना स्वाभाविक नहीं है। मैं एक युवक को जानता हूँ जिसे लड़कियों की जीवनशैली बहुत पसंद थी। वह लडकियों की तरह ही चलता था, लड़कियों की तरह ही बाल कटवाता था, लड़कियों की तरह ही बात-चीत करता था, उसको देखकर ऐसा लगता था कि जैसे किसी स्त्री ने अपने शरीर को पुरूष की खोल से ढक रखा है।


https://www.paltuji.com/
practical life

     अब यह जो युवक है यह लिंग-परिवर्तन के लिए परी तरह तैयार है। यदि इससे कहें कि थोड़े से कष्ट के बाद तुम एक खूबसूरत लड़की बन जाओगे तो यह फौरन राजी हो जायेगा। क्योंकि यह सिर्फ नाम-मात्र का ही पुरूष है, भीतर से यह स्त्री है और जो भीतर है, वही महत्वपूर्ण है, बाहर के शरीर का उतना मूल्य नहीं है। इस तरह के लड़के-लड़कियों को अपना लिंग-परिवर्तन कराने में ज्यादा कठिनाई नहीं होती है, वह सरलता से हो जाता है और बहुत अधिक अभ्यास भी नहीं करना पड़ता है, अन्यथा सालों-साल तो अभ्यास करने में ही निकल जाते हैं और फिर डॉक्टर भी सफलता की गारंटी नहीं ले पाते हैं।

https://www.paltuji.com/



      
Previous
Next Post »