तंत्र-मंत्र में कोई भी शक्ति नहीं होती है, यह पूरी तरह से एक अंधविश्वास से भरा और झूठा विषय है।

एक आदमी है, जिसका नाम है 'सनल एडमारकू, सनल भारत के जाने-माने तर्कवादी और लेखक हैं, वह संपादक के साथ-साथ ही ' रेशनलिस्ट इंटरनैशनल संस्था, के अध्यक्ष भी हैं।



         इस व्यक्ति द्वारा भारत के तमाम प्रसिद्ध तंत्रविदों एवं ज्योतिषाचार्यों को खुली चुनौती दी गयी थी। सनल का कहना था कि अगर तंत्र-मंत्र में कोई शक्ति है या तांत्रिकों के पास कोई भी सिद्धि है जैसा कि तांत्रिक लोग दावा करते हैं तो वह मेरे ऊपर प्रयोग कर सकते हैं और तंत्र-मंत्र के आस्तिव को सत्य प्रमाणित कर सकते हैं।

masoomi raj



         सनल एडमारकू का दावा था कि तंत्र-मंत्र में कोई भी शक्ति नहीं होती, यह पूरी तरह से एक अंधविश्वास से भरा और झूठा विषय है। भारत के अनेक जाने-माने तंत्रविदों व ज्योतिषाचार्यों द्वारा सनल की इस चुनौती को स्वीकार कर लिया गया था, एक एक करके अनेकों प्रयोग सनल एडमारकू के ऊपर तांत्रिकों द्वारा किये गये किन्तु कोई भी सिद्धि, कोई भी तांत्रिक क्रिया सनल का एक बाल भी बांका न कर सकी अलग-अलग मार्गों से, अलग-अलग विधियों से प्रयोग किए गए, श्मशान के रूह कपां देने वाले सन्नाटे से लेकर अमावस की काली रात तक तमाम प्रयोग किए गए, लेकिन लोगों के ऊपर 'मूठ' चलाकर मार डालने का दावा करने वाले तांत्रिक सनल के सिर में क्षण भर के लिए सिरदर्द भी न पैदा कर सके। वह हंसता रहा और तांत्रिकों का मखौल उड़ाता रहा।


         जान लें कि सनल एडमारकू द्वारा वर्ष 2012 में मुंबई के एक गिरजाघर में ईश्वर की कृपा से अचानक पानी निकलने के  दावे का भी पर्दाफाश किया गया था। इस संबंध में कैथोलिक धर्म के अनुयाइयों की तरफ से सनल एडमारकू के खिलाफ ईशनिंदा कहकर तीन याचिकाएं दर्ज करायीं गयी थी। इस घटना से सनल को बड़ा आघात पहुंचा था, और उन्होंने स्वनिर्वासित जीवन जीने का निर्णय कर लिया था।

         अब इस विषय से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें ख्याल में ले लें तो सनल एडमारकू पर तंत्रविदों द्वारा की गई तांत्रिक क्रियाओं का कोई असर क्यों नहीं हुआ यह आसानी से समझा जा सकता है। और यदि आप भी उन बातों को अपने जीवन में सम्मिलित कर लेगें तो आपके ऊपर भी दुनियां का कोई भी तांत्रिक अपनी तंत्र विद्या नहीं चला सकेगा यह आप गांठ बांध लें, पहली बात तंत्र-मंत्र द्विपक्षीय वार्ता जैसा है जैसे मुझे कुछ आपसे कहना है तो मैं तभी कह सकूंगा जब आपके पास सुनने की सामर्थ्य हो अन्यथा मैं कुछ भी कहूंगा आप सुन नहीं सकेंगे और जब आप सुन ही नहीं सकेंगे तो मेरा कहना भी फिजूल हो जाएगा। और कोई भी व्यक्ति जो सिर्फ 'कहने, का ही व्यवसाय करता है, जो केवल कहना ही बाजार में लेकर बेचने निकला है, उसका व्यवसाय बन्द हो जायेगा।

         तंत्र-मंत्र सिर्फ कहने का, सिर्फ बड़बड़ाने का व्यापार है। और यह बिना आपकी सहमति के सफल नहीं होता है, तंत्र-मंत्र को सफल बनाने में हमारी भागीदारी जरूरी है। दुनियां में कहीं भी यदि तंत्रविदों द्वारा किसी के साथ कुछ अहित होता है तो उस घटना में उन लोगों द्वारा ही सहयोग पहुंचाया गया होता है।

          सनल एडमारकू के ऊपर जब कोई इस तरह की क्रियाओं को करता है तो वह सहयोगी नहीं बनता उसका चित्त इस बात को स्वीकार ही नहीं करता कि तंत्र-मंत्र से कुछ होता है, वह इसे जरा भी गंभीरता से नहीं लेता, वह इसे एक मखौल की भांति समझता है उसके लिए तंत्र-मंत्र बच्चों के खेल से ज्यादा नहीं है। और हम यह मानकर ही बैठे हैं कि तंत्र-मंत्र लोगों का नाश करता है, लोगों का अहित करता है। और ख्याल रहे कि जगत हमारी मान्यता के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है, यह हमारी देह भी हमारी मान्यता के कारण ही हमारी है अन्यथा देह हमारी नहीं हो सकती यह प्राकृतिक है, भौतिक है। मान्यता के भाव पर हम आगे और विस्तार से चर्चा करेंगे।



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masoomi raj

         मेरे गांव में लोगों को ख्याल है कि जब उनके दुधारू पशुओं के थनों में दूध की मात्रा कम होने लगती है तो यह मान लिया जाता है कि किसी तांत्रिक द्वारा तंत्र विद्या का प्रयोग किया गया है। और इस तरह के सारे ख्याल संक्रामक होते हैं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संक्रमित होते रहते हैं और सदियों-सदियों तक यह मनुष्य के मन को प्रभावित करते रहते हैं। और यदि कभी कोई सनल एडमारकू जैसा व्यक्ति इस संक्रमण के खिलाफ कुछ कहने का प्रयास भी करता है तो वह व्यक्ति हमारा शत्रु दिखाई पड़ता है फिर वह हमारे बर्दाश्त योग्य नहीं रहता। धीरे-धीरे यह ख्याल छोड़ें, यह स्वीकार का भाव त्यागें, यह इन्कार ही कर दें कि कोई हमारा बुरा कर सकता है फिर देखेंगे कि तंत्र-मंत्र व्यर्थ हो जायेगा।

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