ज्योतिषशास्त्र गणित पर आधारित विषय है इसलिए इसे ज्योतिष विज्ञान भी कहा जाता है।

         

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अब सवाल उठता है , यह सब कैसे हुआ पढ़ते रहिए, हम यहां श्रृंखलाबद्ध एक-एक कर ज्योतिष विद्या से संबंधित तमाम गूण रहस्यों से पर्दा उठायेंगे।



          कथा है! भगवान बुद्ध के जन्म के तीन दिन बाद बुद्ध के पिता राजा शुद्धोदन ने सर्वाधिक सर्वश्रेष्ठ विद्वान ज्योतिषियों को महल में बुलवाया। राजा ने उपस्थित ज्योतिषियों का आदर सत्कार किया और निवेदन किया कि बालक के जीवन के संबंध में कुछ कहें। ज्योतिषियों ने कहा इस बालक की कुंडली में दो संभावनाएं हैं या तो यह बालक युवा होकर बहुत बड़ा सम्राट बनेगा अथवा बहुत बड़ा सन्यासी, भगवान बुद्ध के जीवन में वे दोनों ही भविष्यवाणियां सत्य सिद्ध हुईं। लगभग तीस वर्षों तक वे सम्राट की भांति जिये और फिर उन्होंने महल त्याग दिया और सन्यस्त हो गये।

        जीसस के जन्म के समय में भी एक आकाशीय घटना हुई थी जिसकी खबर तमाम अनुभवी ज्योतिषियों को पता चल गई थी। एक विशेष तारा पूरब दिशा में उदित हुआ था और वह युरुशलेम के उपर जाकर ठहर गया, यह इस बात का संकेत था कि किसी महान चेतना का युरूशलेम में आगमन हो चुका है। चारों दिशाओं से एक-एक ज्योतिषी जीसस के दर्शन करने युरुशलेम पहुंचे थे, भारत से भी एक ज्योतिषी गया था।

        सन् 2002 में एक घटना दिल्ली से सटे गुरुग्राम में एक बड़े ज्वैलर्स के साथ हुई थी जिसका मैं स्वयं ही प्रत्यक्षदर्शी रहा। एक महिला गर्भ से थी समय पूरा व असहनीय पीड़ा होने के बाद भी महिला शिशु को जन्माने में असमर्थ थी, डाॅक्टर व मेडिकल रिपोर्टें महिला व उसके गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा को लेकर स्वस्थ नहीं थीं, विकल्प के तौर पर महिला का आप्रेशन होना तय था लेकिन मुसीबत यह थी कि उस महिला के पिता की ज्योतिष में बड़ी प्रगाढ़ आस्था थी उनके मित्र का एक ज्योतिष कार्यालय भी था जहां वे अक्सर जाया करते थे इसलिए वे किसी लापरवाही के समर्थन में नहीं थे, वे सुनिश्चित कर लेना चाहते थे दिन, तारीख, समय, स्थान! चुनाव कर लेना चाहते थे कब उन्हें शिशु को जन्माना है! वह शुभ तारीख क्या होगी, शुभ दिन कौंन होगा, शुभ समय क्या होना चाहिए, किस स्थान पर, किस अस्पताल में बच्चे का आप्रेशन करवाया जाय जो उसके भविष्य के लिए शुभ हो, अनुकूल मुहूर्त न मिलने तक महिला के आप्रेशन को टाल दिया गया। करीब छ: घंटे बाद वह दिन, तारीख, समय, स्थान चुन लिया गया और सफल आॅप्रेशन करा लिया गया। महिला व शिशु को स्वस्थ देखकर सब बहुत प्रसन्न थे।

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अब सवाल उठता है, यह सब कैसे हुआ? पढ़ते रहिए, हम यहां श्रृंखलाबद्ध एक-एक कर ज्योतिष विद्या से संबंधित तमाम गूण रहस्यों से पर्दा उठायेंगे।



          सबसे पहले हम इसी घटना को समझेंगें कि यह कैसे हुआ और यदि हम इस एक घटना को समझ लेंगे तो अन्य घटनाएँ समझना हमारे लिए बहुत सहज हो जाएगा। लेकिन इससे पहले यह जान लें कि ज्योतिषशास्त्र गणित पर आधारित विषय है इसलिए इसे ज्योतिष विज्ञान भी कहा जाता है। अर्थात यह कोई अंधविश्वास का विषय नहीं है। यह विज्ञान द्वारा भी सिद्ध हो चुका है। भारत के अतिरिक्त और भी तमाम देश ज्योतिष विद्या के रहस्यों को जानने और समझने के लिए बड़ी गंभीरता से प्रयोग कर रहे हैं और वे प्रयोग सफल भी हो रहे हैं।



         इस शाखा से जुड़े कई बड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव मनुष्य ही नहीं बल्कि समस्त प्राणियों के जीवन को बहुत अधिक मात्रा प्रभावित करता है। इतना ही नहीं उनका यह भी अनुमान है कि यदि किसी स्त्री को गर्भवती होने से बचाना हो या वह स्त्री आजीवन गर्भाधान की पीड़ा से मुक्त होना चाहती हो तो यह बिल्कुल संभव है इसमें कोई ज्यादा कठिनाई नहीं है बस उस स्त्री के उस समय को चिन्हित करना पड़ेगा जब वह मासिक धर्म की स्थिति में होती है और उस समय को आसानी से चिन्हित किया जा सकता है, मुश्किल जरा भी नहीं है। और उस चिन्हित समय में उस स्त्री से यदि कोई पुरुष काम संबंध न स्थापित करे तो वह स्त्री कभी भी मां नहीं बन सकेगी। ऐसा नहीं है वह सक्षम नहीं होगी, वह सक्षम होगी, एक बच्चे को जनने के लिए वह पूरी तरह स्वस्थ भी होगी लेकिन वह गर्भधारण नहीं कर सकेगी। क्योंकि जिस घड़ी पल में वह गर्भ को स्वीकार कर सकती थी उस घड़ी पल को छोड़ दिया गया।

इस सब के पीछे प्रयोजन यह है कि यह उपाय वगैर गर्भपात किए, बिना अपराध किए मुल्कों की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने में सहयोगी सिद्ध होने वाला है।


          समय बड़ा बलवान है! उस महिला का आप्रेशन भी समय को ख्याल में रखकर ही किया गया। जिस घड़ी और पल में शिशु के जीवन में खतरे की आशंका थी उस समय को टाल दिया गया और स्वेछा से शुभ मुहूर्त का चयन किया गया। प्रत्येक दो घंटे के अंतराल में सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश कर जाता है और समय परिवर्तित हो जाता है। इसलिए ज्योतिषशास्त्र में जन्म-दिन, जन्म-तारीख, जन्म-वर्ष के साथ-साथ जन्म-समय की भी अहम भूमिका है, इसके बिना किसी भी व्यक्ति के जीवन के संबंध जानकारी देना तीर और तुक्का सिद्ध होने वाला है, वह वैज्ञानिक नहीं हो सकता। भारत में अधिकांश भविष्यवक्ता सिर्फ तीर और तुक्के का ही व्यापार कररहे हैं। किन्तु यहाँ उससे कोई प्रयोजन नहीं है।

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         ज्योतिष का ठीक-ठीक विज्ञान यदि हमारी समझ में पड़े तो ज्योतिष हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है और ज्योतिष विद्या का उद्देश्य भी यही कि मनुष्य अपने जीवन में आने वाली शुभाशुभ घटनाओं से अवगत हो सके और स्वेच्छा से उन घटनाओं को परिवर्तित कर सके जैसा उस समझदार ज्वैलर्स ने किया।
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