एक सुरक्षा ऐसी भी होती है जैसे आप टीवी के रिमोट पर गार्ड लगाकर रखते हैं,

             एक सुरक्षा ऐसी भी होती है जैसे आप टीवी के रिमोट पर गार्ड लगाकर रखते हैं, मोबाइल फोन पर कवर लगाकर रखते हैं ताकि जब वह गिरे तब टूटे नहीं सुरक्षित रहे! दूसरी एक और सुरक्षा है जिसकाे कि सुरक्षा कहना उचित नहीं होगा! लेकिन वह भी कुछ राहत देती है, वह है चिपकाने वाला पदार्थ "फेवीक्विक" इसका काम यह है कि जब कोई वस्तु टूट जाए, बिखर जाए, तब इस पदार्थ से उसे जोड़ दिया जाए, चिपका दिया जाए!

   हमने जो यह खड़ी की है सुरक्षा व्यवस्था महिलाओं के लिए वह टीवी के रिमोट गार्ड जैसी नहीं है वह "फेवीक्विक" जैसी है कि जब लूट जाती है अस्मत, जब कुरूप हो जाती है पहचान, जब कट जाती है देह टुकड़ों में तो फिर चलो उन टुकड़ों को समेटो और जोड़ाे तो सब पुनर्वास के इंतजाम किये जाते हैं सहानुभूति बटोरी जाती है, मुआवजे का प्रावधान है! लेकिन सब घटना घटने के बाद! और कितना जोड़ाेगे, और कितना चिपकाओगे यह जीवन है कोई खिलवाड़ नहीं जीवन एक बार बिखर गया फिर नहीं जुड़ता और यदि जुड़ भी जाए तो भी यह गांठ अखरती है पूरी जिंदगी, समाज की आंखों में लट्ठ की भांति चुभती है!!


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