तंत्र-मंत्र क्या है, यह कितना प्रभावशाली है, वे कौंन-कौंन लोग हैं जो आसानी से तंत्र की चपेट में आ सकते हैं।

           तंत्र-मंत्र क्या है, यह कितना प्रभावशाली है, वे कौंन-कौंन लोग हैं जो आसानी से तंत्र की चपेट में आ सकते हैं, क्या तंत्र-मंत्र सभी के ऊपर समान रुप से प्रभाव डालता है। तंत्र के संबंध में ऐसे तमाम सवाल हैं जो हमारे मन जिज्ञासा उत्पन्न करते हैं और जिन्हें जान लेना हमारे लिए अति-आवश्यक है।



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          विषय के विस्तार में जाने से पहले दो तीन बातें समझ लेंगे तो मैं जो समझाना चाह रहा हूँ वह आसानी से समझा जा सकेगा। मनुष्य मन तमाम भ्रांतियों का एक गठजोड़ है उन्हीं तमाम भ्रांतियों में मुख्यतः एक भ्रांति है जो हमें बहुत जोर से पकड़े हुए है वह है 'मान्यता का भाव, है। हमारे भीतर किसी भी विषय को वास्तविक रूप देने के लिए मान्यता का भाव ही अहम भूमिका निभाता है। मान्यता को हम' धारणा, भी कह सकते हैं। पतंजलि योग में ध्यान, धारणा, समाधि की साधना में धारणा एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य अंग मानी गई है।


           किसी भी सत्य के भीतर यदि हम प्रवेश करें, उसे जानने के लिए तो उसकी गहराई में, उसके अंतिम छोर पर हमें जो निर्णय प्राप्त होगा वह हमारी मान्यता ही होगी जैसे पदार्थ है, पदार्थ हमारे लिए सत्य था अभी तक लेकिन अब नहीं है। विज्ञान उसे तोड़ता गया और तोड़ता गया अंत में वह उस स्थान पर आ गया जहां और तोड़ना अभी के लिए कठिन मालुम पड़ने लगा। इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन, न्यूट्रोन यह पदार्थ के वे मूल कण हैं जिनके बाबत विज्ञान की सब व्याख्या मान्यता के आधार पर ही निर्भर है। अगर विज्ञान से पूछें कि इलक्ट्रोन क्या है तो वह जो उत्तर देगा वह सत्य नहीं होगा वह मान्यता होगी।



           मेरे कहने का मतलब समझे होंगें आप, यह कि क्या सत्य है, क्या मान्यता है इसका भेद समझ पाना हमारे लिए इतना आसान मामला नहीं है। तंत्र-मंत्र इसी मान्यता पर निर्भर है, मान्यता का भाव ही तंत्र-मंत्र का मुख्य हथियार है। सदियों-सदियों से हमने इस मान्यता को सींचा है यह उसी का परिणाम है। तंत्र-मंत्र के निर्माताओं ने जिस उद्देश्य से इसका आविष्कार किया था, जिस उद्देश्य से इस उत्पाद को चालू किया था वह उनका उद्देश्य सफल हुआ क्योंकि तंत्र-मंत्र एक व्यवस्थित और स्वचलित ठंग से लगभग संपूर्ण मनुष्यता के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। आज लगभग हर कोई इसके प्रभाव में जी रहा है और प्रभावित भी हो रहा है, भारत जैसे मुल्कों में सदियों से लाखों लोग इससे रोजगार पा रहे हैं। ऐसा लगता है यही इस योजना का मुख्य उद्देश्य रहा होगा, यह एक बिजनेस आइडिया रहा होगा।


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          स्वभावत: प्राकृति के नियमानुसार यहां सभी वस्तुएं विकृत होती हैं और उस विकृतिकरण के कारण उन वस्तुओं का मनुष्यों पर पड़ने वाला प्रभाव भी परिवर्तित होता है। आज जो प्रभाव है हमारे ऊपर तंत्र-मंत्र का वह बहुत नकारात्मक है, वह शुभ नहीं है और न ही हितकर है और अब तंत्र-मंत्र की कोई विशेष उपयोगिता भी नहीं है, इसलिए अब ज्यादा सजग होने की जरूरत है। शेष अगले भाग में....

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