Kya is dharti par Vempayrs ka vajood hai. क्या इस धरती पर भी बेम्पायर्स का वजूद है?

बेम्पायर, एक ऐसी कल्पना की दुनियां, एक ऐसा सपनों का जगत जहाँ न नैतिकता है, न नीति-नियम हैं, न रिस्ते-नाते न थाना-पुलिस है और जहाँ न अदालते ही हैं। जहाँ व्यक्ति सामाजिक बंधनों से पूर्णत: स्वतंत्र है।

     निश्चित ही मन में जिज्ञासा पनपती है, मन जानने के लिए आतुर होता है। आखिर वह दुनियां कैसी होगी? कैसे उस जगत में प्रवेश संभव है? है भी या नहीं। पिछले पचास सालों के अन्तर्गत आधुनिक विज्ञान उस आयाम के विषय में जानकारी जुटाने की कोशिशों में बहुत हद तक सफल रहा है। जब मैं विज्ञान की बात कह रहा हूँ तो इसका मतलब भारतीय विज्ञान से मत समझ लेना भारतीय विज्ञान को तो उस आयाम के बाबत "कखग" भी नहीं मालुम। वह बहुत एडवांस वैज्ञानिकों की खोज है। भारतीय तंत्र, उस दुनियां के विषय में, उस आयाम के विषय में अवश्य ही बहुत कुछ जानता है। लेकिन उसके पास भी अभिव्यक्ति की कोई वैज्ञानिक व्याख्या नहीं है। इसलिए वह भी सिर्फ घृणा और निंदा का ही पात्र रहा है।

   वैज्ञानिकों की क्षमता के तुल्य उनके पास अब खोजने के लिए बहुत कुछ शेष नहीं रह गया है। जो खोजा जाना संभव था, जहाँ तक विज्ञान को पैर पसारने थे, जहाँ तक विज्ञान को उड़ान भरनी थी, वह सब हो चुका! स्वतंत्र कणों के "इलक्ट्रोन, न्यूट्रोन, प्रोटोन" की उपलब्धि ने वैज्ञानिकों की दौड़ में ब्रेक लगा दिया है।

    अब विज्ञान की सारी दौड़, सारी जिज्ञासा, सारी उत्सुकता उस आयाम को जानने में इच्छुक है। और वे उसको समझने में सफल होते जा रहे हैं। यह जो आप सुनते हैं, चौथे आयाम की चर्चा होती है, फोर्थ डायमेंशन की बात चलती है, यह कोई कोरी गप्प नहीं है और न ही कोरी कल्पना है। यह वास्तविकता है। और बहुत जल्द विज्ञान उस चौथे आयाम में प्रवेश पा लेगा। और हम मंदिर व मस्जिद के लिए ही जूझते रहेंगे।

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      यह जो चौथा आयाम है, यह जो चौथी दुनियां है, इसके बाबत अगर आप ऩही जानते तो कुछ इशारे समझने से इसकी कल्पना सहज हो जायेगी। हम जिस डिग्री पर जीते हैं, जिस आयाम में जीते हैं उसे तीसरा समझे! तीसरे तक ही नियम-कानून लागू होते हैं, तीसरे तक ही सामाजिक नैतिकता है, तीसरे तक ही सगे-संबंधी हैं। चौथे की सुगबुगाहट मिलते ही बुद्धी द्वारा निर्मित ढांचा हिलने लगता है। समझ में नहीं आता कैसे निर्णय करें, क्या सही है क्या सही नहीं है।

     और उस चौथे में प्रवेश के खतरे भी बड़े अपरिचित हैं। उन खतरों की ठीक से व्याख्या अभी विज्ञान भी नहीं कर पा रहा है! विज्ञान की जो 'क्वान्टम' की व्याख्या है, वह चौथे की ही व्याख्या है। लेकिन वह भी बहुत स्पष्ट नहीं है। क्योंकि वहाँ सब तरल हो जाता है, सब घुल-मिल जाता है, यह भी समझ में नहीं आता कि कौन पत्नी है, कौन जननी है, कौन पिता है, कौन पुत्र है। कौन किससे जन्म रहा है, मृत्यु के पश्चात कौन कहां जा रहा है! यह इसलिए मैं इशारा कर रहां हूं ताकि आपको थोड़ा सा ख्याल आ सके। और अधिक उसके बाबत कहना ठीक नहीं है।

    वेम्पायर इसी चौथी दुनियां का सत्य हैं, इसी चौथे आयाम की वास्तविकता हैं! लेकिन तीसरे डायमेंशन में जीने वालों के लिए वे महज कल्पना मात्र ही हैं।




           
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